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सफलता के मूल मंत्र

key  of success

The key of success

Friends मैं अपने personal development page के अंतर्गत आज एक नया topic ले कर आयी हूँ “सफलता के मूल मन्त्र”। आज school, colleges और society में youth के सामने सबसे बड़ी समस्या होती है सफलता-- कोई अपने result में best करने के लिए जूझ रहा है तो कोई अपनी job - life में higher post तक न पहुँच पाने में depression में जा रहा है । तो कोई सपने न सच कर पाने के कारण suicide के पथ पर कदम रखने चला है । आज का youth सस्याओं का सामना करने के बजाये उससे मुँह छिपाता है जिसका नतीजा बड़ा ही भयंकर आता है ।  

आज मैं इस article के अंतर्गत मैं उन points को discuss करने जा रही हूँ जिस को अपना कर students and younger अपने targeted goal तक पहुँचने में सफल हो सकते हैं। और अपने destination पर पहुँच कर एक happy life को enjoy कर सकते है ।

The key of success

कार्य करने का कारण (Work Reason)- किसी भी कार्य में success पाने का basic key ये है की आप जो भी कार्य करना कहते हैं या करने जा रहे हैं उसके प्रति आप का नजरिया साफ़ होना चाहिए । उससे करने और न करने का कारण आप के मन में clear होना चाहिए कि उसे आप कर क्यों रहे हैं । अर्थात् first decide to your work or goal.

सकारात्मक और नकारात्मक पहलू (The positive and negative aspects)- आप जो भी काम करने जा रहे हैं उसके positive and negative aspects को अच्छे से पता कर ले ताकि बीच में इसके negative aspects के कारण आप को अपना काम या goal change न करना पड़े और ना ही आप हतोत्साहित हो । जैसे यदी आप b.tech करने जा रहे हैं तो math और science में आप की पकड़ अच्छी हो और जिस stream में आप करने जा रहे है उसकी current market value क्या है । गर आप ये पता नहीं करते तो हो सकता है B.tech की degree आप की बीच में ही छूट जाये या आप के लिए बेकार साबित हो । 

क्षमता(Ability)- किसी भी कार्य या क्षेत्र में सफल होने के लिए आप का अपनी क्षमताओं के प्रति सजग होना जरूरी है । आप को अपनी क्षमता की पहचान होनी चाहिए कि आप किस क्षेत्र को चुने । जैसे यदी आप को market की समझ है और accounting में आप की पकड़ अच्छी है तो आप अपने graduation में B.A के स्थान पर B.com या B.B.A चुनिए। आप को सफलता अवश्य मिलेगी । 
so, firstly judge your Capabilitythen choose your goal.  

दृढ़ निश्चय (firm determination)-  जब आप अपनी life का goal चुन ले तब उस तक पहुचने के लिए आप को दृढ़ निश्चयी होना जरूरी है । जितना आप अपने लक्ष्य तक पहुचने के प्रति determinate होंगे, उतना लक्ष्य तक पहुचना आसान हो जायेगा ।

एकाग्रता (concentration)- किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए एकाग्रता बहुत जरूरी है । जितना concentrate हो कर आप अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होंगे, उतना ही लक्ष्य आप के करीब पहुचेगा।

friends, अंत में इतना ही कहूँगी की सफलता प्राप्ति के इन मन्त्रों को यदी आप अपनाएंगे तो निश्चय ही आप अपने निर्धारित destination तक अवश्य पहुचेंगे

“सफलता के दो ही मूल मंत्र हैं- दृढ़ निश्चय और एकाग्रता ।”


Friend’s, आप को मेरी, The key of success” personal development and motivational article in Hindi में कैसा लगाक्या ये article आप सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये ।  


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The key of success-सफलता के मूल मंत्र- personal development article in Hindi



सफलता के मूल मंत्र

key  of success

The key of success

Friends मैं अपने personal development page के अंतर्गत आज एक नया topic ले कर आयी हूँ “सफलता के मूल मन्त्र”। आज school, colleges और society में youth के सामने सबसे बड़ी समस्या होती है सफलता-- कोई अपने result में best करने के लिए जूझ रहा है तो कोई अपनी job - life में higher post तक न पहुँच पाने में depression में जा रहा है । तो कोई सपने न सच कर पाने के कारण suicide के पथ पर कदम रखने चला है । आज का youth सस्याओं का सामना करने के बजाये उससे मुँह छिपाता है जिसका नतीजा बड़ा ही भयंकर आता है ।  

आज मैं इस article के अंतर्गत मैं उन points को discuss करने जा रही हूँ जिस को अपना कर students and younger अपने targeted goal तक पहुँचने में सफल हो सकते हैं। और अपने destination पर पहुँच कर एक happy life को enjoy कर सकते है ।

The key of success

कार्य करने का कारण (Work Reason)- किसी भी कार्य में success पाने का basic key ये है की आप जो भी कार्य करना कहते हैं या करने जा रहे हैं उसके प्रति आप का नजरिया साफ़ होना चाहिए । उससे करने और न करने का कारण आप के मन में clear होना चाहिए कि उसे आप कर क्यों रहे हैं । अर्थात् first decide to your work or goal.

सकारात्मक और नकारात्मक पहलू (The positive and negative aspects)- आप जो भी काम करने जा रहे हैं उसके positive and negative aspects को अच्छे से पता कर ले ताकि बीच में इसके negative aspects के कारण आप को अपना काम या goal change न करना पड़े और ना ही आप हतोत्साहित हो । जैसे यदी आप b.tech करने जा रहे हैं तो math और science में आप की पकड़ अच्छी हो और जिस stream में आप करने जा रहे है उसकी current market value क्या है । गर आप ये पता नहीं करते तो हो सकता है B.tech की degree आप की बीच में ही छूट जाये या आप के लिए बेकार साबित हो । 

क्षमता(Ability)- किसी भी कार्य या क्षेत्र में सफल होने के लिए आप का अपनी क्षमताओं के प्रति सजग होना जरूरी है । आप को अपनी क्षमता की पहचान होनी चाहिए कि आप किस क्षेत्र को चुने । जैसे यदी आप को market की समझ है और accounting में आप की पकड़ अच्छी है तो आप अपने graduation में B.A के स्थान पर B.com या B.B.A चुनिए। आप को सफलता अवश्य मिलेगी । 
so, firstly judge your Capabilitythen choose your goal.  

दृढ़ निश्चय (firm determination)-  जब आप अपनी life का goal चुन ले तब उस तक पहुचने के लिए आप को दृढ़ निश्चयी होना जरूरी है । जितना आप अपने लक्ष्य तक पहुचने के प्रति determinate होंगे, उतना लक्ष्य तक पहुचना आसान हो जायेगा ।

एकाग्रता (concentration)- किसी भी कार्य को पूरा करने के लिए एकाग्रता बहुत जरूरी है । जितना concentrate हो कर आप अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होंगे, उतना ही लक्ष्य आप के करीब पहुचेगा।

friends, अंत में इतना ही कहूँगी की सफलता प्राप्ति के इन मन्त्रों को यदी आप अपनाएंगे तो निश्चय ही आप अपने निर्धारित destination तक अवश्य पहुचेंगे

“सफलता के दो ही मूल मंत्र हैं- दृढ़ निश्चय और एकाग्रता ।”


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हम क्यों स्वयं को गिराते है

आज के परिवेश को देख कर मन में बड़ी पीड़ा हो रही है मन बार - बार यही प्रश्न करता है कि हम क्यों स्वयं को गिराते है । आज हर व्यक्ति चाहे वो साधारण इंसान कहलाने वाला एक किसान या मजदूर हो या फिर एक उच्च वर्ग को सम्बोधित करने वाला एक प्रतिष्ठित business men या कोई नेता या फिर यूँ कहे अपने समाज को चलाने वाले धर्म guru धर्माचार्य सब के सब आचरण और व्यवहार से निम्न श्रेणी में आ खड़े हुए हैं ।
आज अपने को सभ्य और अनुकरणीय मानने वाले लोगों का ही जीवन छलावे से भरा – पूरा है ये आज समाज में रह कर समाज को उसी प्रकार लुट रहे हैं जैसे दीमक लकड़ी में रह कर लकड़ी को खोखला करती है।
ऐसे ही आज साधु के वेश में समाज को लूटने वाले ये समाज के पुरोधा अपने ही समाज जिसको वो अपना परिवार कहते हैं उसे लुटेरों कि तरह लुट रहें हैं । हमारे देश पर न जाने कितनी बार लुटेरों ने हमला किया और उसे लूटा पर जिस तरह आज अपना देश लुट रहा है अपने ही देश के रक्षकों से उस तरह तो अपना देश कभी नहीं लुटा।
कभी कभी मेरे दिल में ये ख्याल आता है कि ये ऐसा क्यों करते हैं कहाँ है इस की जड़ें... कोण से पेड़ इन को चाय देते आहे जो ये इतने पनप रहें है की इनकी आत्मा को जरा सा भी खोफ कानून का या परमात्मा का नहीं है कि इनको भी कभी दंड मिलेगा । इनको दुराचरण में आनंद और सदा चरण में दुःख कि अनुभूति इसीलिए होती है कि ये जानते है कि इन्हें इनके कर्मों का दंड नहीं मिलेगा। जनता- समाज को इन लोगों ने अपने मोह- पाश में जो बाँध रखा है ।
इस सृष्टि कि रचना करने वाले राजा कि सबसे बड़ी संतान कहलाने वाले हम मानव है और मानव को उसके इस साम्राज्य का राजकुमार माना जाता है। मानव के मजबूत कंधे पर ही इस सृष्टि के संचालन करने की शक्ति है, फिर इस शक्ति का उपयोग सबके हित में करने कि बजाय थोड़े से स्वार्थ हित और छडिक सुख के लिए मानव दुराचारी बन कर स्वयं को क्यों गिरता है।
सदाचारी जीवन सदैव उन्नति का दौतक है इसके दवारा ही समाज में श्रेष्ठ प्रतिको कि स्थापना हो सकती है; जिससे इस समाज और समाज में रहने वाले हर स्त्री – पुरुष अपने को सुरक्षित कर सकते है और साथ ही उन्नति व प्रगति की नयी राहे बना सकते हैं।
एक गलत कार्य करने वाला  ये सोचता है कि उसे कोई जन नहीं पायेगा, समाज या कानून भी उनको सजा नहीं दे पायेगा क्यों कि वो ऐसा अपने आस पास आवरण तैयार रखते है जिससे वो बाख जायेंगे और ये सच भी है की वो बच जाते है ;पर क्या वो God की नजर से बाख पायेंगे या अपनी अंतर आत्मा से। एक दुराचारी आत्मग्लानी की पीड़ा से पीड़ित एवं उद्धेलित रहता है। वही पर एक सदाचारी का जीवन सदैव आत्म संतोष से सराबोर रहता है ।
गर हम अपने समाज को पतन से व अपराध से मुक्त करना चाहते हैं तो हमे अपने समाज में श्रेष्ठ विचारों व व्यवहार का आचरण उतरना होगा। एक सदाचारी का जीवन सदैव आत्म संतोष से सराबोर रहता है । केवल पीले, सफ़ेद व गेहुए वस्त्र पहनकर समाज को ठगना नहीं है बल्कि सही मायने में स्वेत - स्वच्छ, निर्मल विचारों को सबके हृदय में देव मूर्ति कि तरह स्थापित करना होगा तभी हम अपने समाज को गिरने से बचा सकते है और गर्व से कह सकते है की हम उस देश के वासी हैं जहाँ कभी राम का राज्य था । हम में मर्यादा है । सदाचरण है। हम उन्नत विश्व के रचना कार है । हम भारत के वासी हैं ।     

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Why do we shed themselves

Why do we shed themselves


हम क्यों स्वयं को गिराते है

आज के परिवेश को देख कर मन में बड़ी पीड़ा हो रही है मन बार - बार यही प्रश्न करता है कि हम क्यों स्वयं को गिराते है । आज हर व्यक्ति चाहे वो साधारण इंसान कहलाने वाला एक किसान या मजदूर हो या फिर एक उच्च वर्ग को सम्बोधित करने वाला एक प्रतिष्ठित business men या कोई नेता या फिर यूँ कहे अपने समाज को चलाने वाले धर्म guru धर्माचार्य सब के सब आचरण और व्यवहार से निम्न श्रेणी में आ खड़े हुए हैं ।
आज अपने को सभ्य और अनुकरणीय मानने वाले लोगों का ही जीवन छलावे से भरा – पूरा है ये आज समाज में रह कर समाज को उसी प्रकार लुट रहे हैं जैसे दीमक लकड़ी में रह कर लकड़ी को खोखला करती है।
ऐसे ही आज साधु के वेश में समाज को लूटने वाले ये समाज के पुरोधा अपने ही समाज जिसको वो अपना परिवार कहते हैं उसे लुटेरों कि तरह लुट रहें हैं । हमारे देश पर न जाने कितनी बार लुटेरों ने हमला किया और उसे लूटा पर जिस तरह आज अपना देश लुट रहा है अपने ही देश के रक्षकों से उस तरह तो अपना देश कभी नहीं लुटा।
कभी कभी मेरे दिल में ये ख्याल आता है कि ये ऐसा क्यों करते हैं कहाँ है इस की जड़ें... कोण से पेड़ इन को चाय देते आहे जो ये इतने पनप रहें है की इनकी आत्मा को जरा सा भी खोफ कानून का या परमात्मा का नहीं है कि इनको भी कभी दंड मिलेगा । इनको दुराचरण में आनंद और सदा चरण में दुःख कि अनुभूति इसीलिए होती है कि ये जानते है कि इन्हें इनके कर्मों का दंड नहीं मिलेगा। जनता- समाज को इन लोगों ने अपने मोह- पाश में जो बाँध रखा है ।
इस सृष्टि कि रचना करने वाले राजा कि सबसे बड़ी संतान कहलाने वाले हम मानव है और मानव को उसके इस साम्राज्य का राजकुमार माना जाता है। मानव के मजबूत कंधे पर ही इस सृष्टि के संचालन करने की शक्ति है, फिर इस शक्ति का उपयोग सबके हित में करने कि बजाय थोड़े से स्वार्थ हित और छडिक सुख के लिए मानव दुराचारी बन कर स्वयं को क्यों गिरता है।
सदाचारी जीवन सदैव उन्नति का दौतक है इसके दवारा ही समाज में श्रेष्ठ प्रतिको कि स्थापना हो सकती है; जिससे इस समाज और समाज में रहने वाले हर स्त्री – पुरुष अपने को सुरक्षित कर सकते है और साथ ही उन्नति व प्रगति की नयी राहे बना सकते हैं।
एक गलत कार्य करने वाला  ये सोचता है कि उसे कोई जन नहीं पायेगा, समाज या कानून भी उनको सजा नहीं दे पायेगा क्यों कि वो ऐसा अपने आस पास आवरण तैयार रखते है जिससे वो बाख जायेंगे और ये सच भी है की वो बच जाते है ;पर क्या वो God की नजर से बाख पायेंगे या अपनी अंतर आत्मा से। एक दुराचारी आत्मग्लानी की पीड़ा से पीड़ित एवं उद्धेलित रहता है। वही पर एक सदाचारी का जीवन सदैव आत्म संतोष से सराबोर रहता है ।
गर हम अपने समाज को पतन से व अपराध से मुक्त करना चाहते हैं तो हमे अपने समाज में श्रेष्ठ विचारों व व्यवहार का आचरण उतरना होगा। एक सदाचारी का जीवन सदैव आत्म संतोष से सराबोर रहता है । केवल पीले, सफ़ेद व गेहुए वस्त्र पहनकर समाज को ठगना नहीं है बल्कि सही मायने में स्वेत - स्वच्छ, निर्मल विचारों को सबके हृदय में देव मूर्ति कि तरह स्थापित करना होगा तभी हम अपने समाज को गिरने से बचा सकते है और गर्व से कह सकते है की हम उस देश के वासी हैं जहाँ कभी राम का राज्य था । हम में मर्यादा है । सदाचरण है। हम उन्नत विश्व के रचना कार है । हम भारत के वासी हैं ।     

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सफल और लोकप्रिय बनने के दस नियम

Ten rules to becoming successful and popular 

सफलता एक ऐसा शब्द है जिसे अपने जीवन से हर व्यक्ति जोड़ना चाहता है । पर क्या जितनी आसानी से हम ये चाहते है उसी आसानी से ही सफलता हमे मिल जाती है ?

नहीं, friends ये इतना आसान नहीं है अपर असंभव भी नहीं है हाँ थोड़ा कठिन जरुर है क्योंकि सफलता की चोटी तक पहुचने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है और continuously लगे रहना पड़ता है । जब तक desire success मिल नहीं जाती।

क्या कभी आप ने सोचा है कि सफल लोगों के पास success और लोकप्रिय बनने की ऐसी कौन सी key होती है ? जिससे वो अपने जीवन की peek success को प्राप्त करते है।

Friends, सफल लोगों के पास लोकप्रिय व सफल बनने कि योजना होती है । जो लोग चोटी पे पहुचते हैं वे इस बारे में ज्यादा सोचते है कि वे वो ऐसी कौन सी Technic अपनाएँ जो लोग उनसे प्रभावित हो और वो उन लोगों के बीच अपनी पहचान बनाएं ।

आप लोगों को ये जानकर surprise होगा कि सफल व महान व्यक्तियों के पास लोगों को प्रभावित करने कि एक स्पष्ठ, निर्धरित योजना होती है जिसका वो नियमित follow करते हैं, अपनी सफलता को पाने के लिए और उसे हमेशा  बनाये रखने के लिए।

आज मैं यहाँ पे president लिंडन जॉन्सन के दस सूत्रीय कार्यक्रम के बारे में बात करने जा रही हूँ जिसको उन्होंने अपने president बनने से पहले तैयार किया था। इतिहास गवाह है कि उन्होंने इन rules को हमेशा अपने जीवन में उतारा और बुलंदियों को छुआ । इन rules का जिक्र मशहूर लेखक David J. Schwartz ने अपनी book “बड़ी सोच का जादू” में किया है । 
ये rules इस प्रकार हैं:-  
         
  1. एक ऐसा हँसमुख व्यक्ति बनिए, जिसके साथ होने पर कोई तनाव में ना रहे।  
  2. अपने मष्तिष्क को शांत रखने कि आदत डालिए ताकि कठिन परिस्थितियों में आप उत्तेजित या परेशान ना हो पाएं। और सही निर्णय ले सकें ।
  3. नाम याद रखने कि आदत डाले । अगर आप ऐसा नहीं करते है तो सामने वाले को यह लग सकता है कि आपकी उनमे रूचि नहीं है।
  4. बड- बोल मत बोलिए। अर्थात ऐसी बड़ी बड़ी बाते मत बोलिए जिससे आप का ही रोब झलके। सामने वाले को यह एहसास न होने दें कि आप खुद को ही सर्व ज्ञानी समझते हैं और सामने वाला आप के समक्ष कुछ भी नहीं है।
  5. अपने आप को दिलचस्प बनाइये जिससे लोग आप का साथ पसंद करें। आप के आस पास रहना चाहें।
  6. आप अपने जीवन और व्यवहार से ऐसे तत्वों को निकल दीजिये जो आप के  जीवन में दुःख का कारण बने या यूँ कहें कि ऐसे तत्वों को निकाल दे जो आप के व्यक्तित्व में चुभते हों ।
  7. विशुद्ध भावनावों के साथ हर miss understanding को दूर करने की पूरी कोशिश करें और जल्द से जल्द शिकायतों को नाली में बहा दें।
  8. लोगों को पसंद करने की आदत डालें। और कुछ समय बाद आप सचमुच उन्हें पसंद करने लगेंगे ।    
  9. हमेशा लोगों कि सफलता व उनकी उपलब्धियों पर उन्हें बधाई देने का मौका मत गवाइए । औए ना ही किसी के दुःख या उनकी निराशा में अपनी संवेदना जताने का अवसर खोइए।  
  10. हर पल लोगों की help करने के लिए तैयार रहिये।  लोगों को आध्यात्मिक शक्ति दीजिये और वे आप को पसंद करने लगेंगे।  


इन ten आसान परन्तु बेहद प्रभावी नियमों कि वजह से president जॉन्सन को मतदाताओं ने पसंद किया और वो एक साधारण व्यक्ति से America के president बनें।  




Ten rules to becoming successful and popular


सफल और लोकप्रिय बनने के दस नियम

Ten rules to becoming successful and popular 

सफलता एक ऐसा शब्द है जिसे अपने जीवन से हर व्यक्ति जोड़ना चाहता है । पर क्या जितनी आसानी से हम ये चाहते है उसी आसानी से ही सफलता हमे मिल जाती है ?

नहीं, friends ये इतना आसान नहीं है अपर असंभव भी नहीं है हाँ थोड़ा कठिन जरुर है क्योंकि सफलता की चोटी तक पहुचने के लिए कठिन परिश्रम करना पड़ता है और continuously लगे रहना पड़ता है । जब तक desire success मिल नहीं जाती।

क्या कभी आप ने सोचा है कि सफल लोगों के पास success और लोकप्रिय बनने की ऐसी कौन सी key होती है ? जिससे वो अपने जीवन की peek success को प्राप्त करते है।

Friends, सफल लोगों के पास लोकप्रिय व सफल बनने कि योजना होती है । जो लोग चोटी पे पहुचते हैं वे इस बारे में ज्यादा सोचते है कि वे वो ऐसी कौन सी Technic अपनाएँ जो लोग उनसे प्रभावित हो और वो उन लोगों के बीच अपनी पहचान बनाएं ।

आप लोगों को ये जानकर surprise होगा कि सफल व महान व्यक्तियों के पास लोगों को प्रभावित करने कि एक स्पष्ठ, निर्धरित योजना होती है जिसका वो नियमित follow करते हैं, अपनी सफलता को पाने के लिए और उसे हमेशा  बनाये रखने के लिए।

आज मैं यहाँ पे president लिंडन जॉन्सन के दस सूत्रीय कार्यक्रम के बारे में बात करने जा रही हूँ जिसको उन्होंने अपने president बनने से पहले तैयार किया था। इतिहास गवाह है कि उन्होंने इन rules को हमेशा अपने जीवन में उतारा और बुलंदियों को छुआ । इन rules का जिक्र मशहूर लेखक David J. Schwartz ने अपनी book “बड़ी सोच का जादू” में किया है । 
ये rules इस प्रकार हैं:-  
         
  1. एक ऐसा हँसमुख व्यक्ति बनिए, जिसके साथ होने पर कोई तनाव में ना रहे।  
  2. अपने मष्तिष्क को शांत रखने कि आदत डालिए ताकि कठिन परिस्थितियों में आप उत्तेजित या परेशान ना हो पाएं। और सही निर्णय ले सकें ।
  3. नाम याद रखने कि आदत डाले । अगर आप ऐसा नहीं करते है तो सामने वाले को यह लग सकता है कि आपकी उनमे रूचि नहीं है।
  4. बड- बोल मत बोलिए। अर्थात ऐसी बड़ी बड़ी बाते मत बोलिए जिससे आप का ही रोब झलके। सामने वाले को यह एहसास न होने दें कि आप खुद को ही सर्व ज्ञानी समझते हैं और सामने वाला आप के समक्ष कुछ भी नहीं है।
  5. अपने आप को दिलचस्प बनाइये जिससे लोग आप का साथ पसंद करें। आप के आस पास रहना चाहें।
  6. आप अपने जीवन और व्यवहार से ऐसे तत्वों को निकल दीजिये जो आप के  जीवन में दुःख का कारण बने या यूँ कहें कि ऐसे तत्वों को निकाल दे जो आप के व्यक्तित्व में चुभते हों ।
  7. विशुद्ध भावनावों के साथ हर miss understanding को दूर करने की पूरी कोशिश करें और जल्द से जल्द शिकायतों को नाली में बहा दें।
  8. लोगों को पसंद करने की आदत डालें। और कुछ समय बाद आप सचमुच उन्हें पसंद करने लगेंगे ।    
  9. हमेशा लोगों कि सफलता व उनकी उपलब्धियों पर उन्हें बधाई देने का मौका मत गवाइए । औए ना ही किसी के दुःख या उनकी निराशा में अपनी संवेदना जताने का अवसर खोइए।  
  10. हर पल लोगों की help करने के लिए तैयार रहिये।  लोगों को आध्यात्मिक शक्ति दीजिये और वे आप को पसंद करने लगेंगे।  


इन ten आसान परन्तु बेहद प्रभावी नियमों कि वजह से president जॉन्सन को मतदाताओं ने पसंद किया और वो एक साधारण व्यक्ति से America के president बनें।  





सुख और दुःख – केवल एक दृष्टिकोण

friends गर आप से कहा जाये कि भगवान की एक दुकान पर सुख और एक दुकान पर दुःख मिल रहा है और आप को इनमे से एक को खरीदना है । तो आप क्या खरीदेंगे.. ? किस दुकान पर जायेंगे..?
i know आप का answer होगा सुख, obesity दुःख तो कोई लेना ही नहीं  चाहेगा । ऐसा क्या है जो हम सब दुःख के नाम से ही कॉप जाते है । सुख की कल्पना मात्र से भावविभोर हो जाते हैं ।

जीवन में सुख और दुःख की परिभाषा क्या है यह कहना बहुत कठिन है, क्योंकि जो आपके लिए सुख का कारण बनता है वही कारण किसी और के जीवन में दुःख का एहसास कराती है। ऐसा इसलिए क्योकि सुख और दुःख तो केवल एक दृष्टिकोण मात्र हैं । जिसकी दृष्टि जैसी होगी उसके जीवन में हर पल हर घटना उसे उसी के अनुरूप सुख या दुःख में से किसी एक का अनुभव करायेगी।

सूरज का प्रकाश, उसका तेज, उसकी सुनहरी धूप प्रात: काल में तो सुख का अनुभव कराती है वही पर दोपहर की तेज, चिलमिलाती धूप कष्टदायक होती है और दुःख का एहसास कराती है । सूरज कि तेज किरणें गर्मी में दुःख और ठण्ड में सुख का एहसास कराती है । यानि कि सूरज तो एक ही है पर वो कभी किसी के लिए आनंद का कारण बनता है तो कभी दुःख का दाता बन जाता है पर सूरज तो एक ही है ना अर्थात हमारा दृष्टिकोण ही है जो सुख और दुःख का अनुभव करता है ।

तो क्या आप अब मेरी बात से सहमत है कि सुख और दुःख- केवल एक दृष्टिकोण है.. अभी नहीं O.K. मैं अपनी बात एक और सन्दर्भ से आप के सामने रखती हूँ ।
भोजन को ही लीजिये! एक व्यक्ति को दो दिन से भोजन ना मिला हो और उसे तेज खूब भूख लगी हो, फिर उसे कही से दो सूखी रोटी खाने को मिल जाएँ । तो उस व्यक्ति को वो रोटी खा कर जिस सुख की अनुभूति होगी वो उसे कीमती सोने चाँदी के ढेर से भी नहीं होगी ।  वहीँ पे एक बीमार व्यक्ति या ऐसा व्यक्ति जिसे  भूख ना हो उसका पेट बहुत भरा हो और उसके के सामने बहुत ही स्वादिष्ट व rich food खाने को रखा हो। उसे खाने कि इच्छा उसे ना हो, या चाह कर भी खाने में असमर्थ हो तो वो भोजन उसे कष्ट प्रद लगेगा, और उस व्यक्ति को दुःख कि अनुभूति होगी कि वो इतना सवादिष्ट food नहीं खा पा रहा। 

एक व्यक्ति के  सामने भोजन आता है तो वह आनंदित होता है और उसे सुख कि अनुभूति होती है वही पर जब दूसरे व्यक्ति के सामने food आता है तो उसे दुःख कि अनुभूति होती है। 
        
अब आप ही बताइए सुख और दुःख क्या है..? एक दृष्टिकोण या फिर...!!!



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Pleasure and pain - just one attitude- A personality development article in Hindi

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सुख और दुःख – केवल एक दृष्टिकोण

friends गर आप से कहा जाये कि भगवान की एक दुकान पर सुख और एक दुकान पर दुःख मिल रहा है और आप को इनमे से एक को खरीदना है । तो आप क्या खरीदेंगे.. ? किस दुकान पर जायेंगे..?
i know आप का answer होगा सुख, obesity दुःख तो कोई लेना ही नहीं  चाहेगा । ऐसा क्या है जो हम सब दुःख के नाम से ही कॉप जाते है । सुख की कल्पना मात्र से भावविभोर हो जाते हैं ।

जीवन में सुख और दुःख की परिभाषा क्या है यह कहना बहुत कठिन है, क्योंकि जो आपके लिए सुख का कारण बनता है वही कारण किसी और के जीवन में दुःख का एहसास कराती है। ऐसा इसलिए क्योकि सुख और दुःख तो केवल एक दृष्टिकोण मात्र हैं । जिसकी दृष्टि जैसी होगी उसके जीवन में हर पल हर घटना उसे उसी के अनुरूप सुख या दुःख में से किसी एक का अनुभव करायेगी।

सूरज का प्रकाश, उसका तेज, उसकी सुनहरी धूप प्रात: काल में तो सुख का अनुभव कराती है वही पर दोपहर की तेज, चिलमिलाती धूप कष्टदायक होती है और दुःख का एहसास कराती है । सूरज कि तेज किरणें गर्मी में दुःख और ठण्ड में सुख का एहसास कराती है । यानि कि सूरज तो एक ही है पर वो कभी किसी के लिए आनंद का कारण बनता है तो कभी दुःख का दाता बन जाता है पर सूरज तो एक ही है ना अर्थात हमारा दृष्टिकोण ही है जो सुख और दुःख का अनुभव करता है ।

तो क्या आप अब मेरी बात से सहमत है कि सुख और दुःख- केवल एक दृष्टिकोण है.. अभी नहीं O.K. मैं अपनी बात एक और सन्दर्भ से आप के सामने रखती हूँ ।
भोजन को ही लीजिये! एक व्यक्ति को दो दिन से भोजन ना मिला हो और उसे तेज खूब भूख लगी हो, फिर उसे कही से दो सूखी रोटी खाने को मिल जाएँ । तो उस व्यक्ति को वो रोटी खा कर जिस सुख की अनुभूति होगी वो उसे कीमती सोने चाँदी के ढेर से भी नहीं होगी ।  वहीँ पे एक बीमार व्यक्ति या ऐसा व्यक्ति जिसे  भूख ना हो उसका पेट बहुत भरा हो और उसके के सामने बहुत ही स्वादिष्ट व rich food खाने को रखा हो। उसे खाने कि इच्छा उसे ना हो, या चाह कर भी खाने में असमर्थ हो तो वो भोजन उसे कष्ट प्रद लगेगा, और उस व्यक्ति को दुःख कि अनुभूति होगी कि वो इतना सवादिष्ट food नहीं खा पा रहा। 

एक व्यक्ति के  सामने भोजन आता है तो वह आनंदित होता है और उसे सुख कि अनुभूति होती है वही पर जब दूसरे व्यक्ति के सामने food आता है तो उसे दुःख कि अनुभूति होती है। 
        
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