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मैं घर आया हूँ मुझे मेहमान ना समझा जाये

I have come home, i am not deemed guests

I have come home, I am not deemed guests

डॉ. हरगोविन्द खुरानाभारतीयमूलकेscientist है, डॉ.हरगोविन्द खुरानाकाजन्मसन्1922मेंमुल्तानकेएकछोटेसेकस्बेरायपुरमें हुआथा, इनकेपितापटवारीथे, डॉ. खुरानाchildhood से ही कुशाग्रबुद्धिकेमालिकथे, उनकोपढ़नेकिबड़ीलगनथी,
Indian government नेडॉ. खुरानाकिलगनकोदेखतेहुएउन्हेंhigher education कि प्राप्तिकेलिएEngland भेजा/

England सेवेdoctorate किउपाधिलेकरIndia वापस आये, परदुर्भाग्यवश! India में डॉ. हरगोविन्दकोअपनेयोग्यकोईjob नहीं मिलसकी औरविवशहोकरउन्हें विदेशवापसजानापड़ा, अबडॉ. खुरानाएकअमरीकीनागरिकहै, उन्हेंवहांकिनागरिकताप्राप्तहै,
डॉ. खुरानानेआनुवांशिकीकिfield मेंबड़ामहत्वपूर्णयोगदानदियाहै, उनकोसन्1968 मेंऔषधिएवम्शरीरक्रियाविज्ञानमेंNobel price प्रदान कियागया/
डॉ. हरगोविन्दखुरानाAmerica में बस जरुरगयेथेपरवोअपनीमातृभूमिकोभूलेनहींथेवोअक्सरअवकाशमिलनेपरIndia अपनेदोस्तोंऔररिश्तेदारोंसेमिलनेआतेरहतेथे/
एक बारकिबातहैडॉ. खुरानाIndia आये, Delhi मेंउनकेस्वागतमेंएकमित्रनेभोजरखा, उनकेलिएdinning table पे पश्चिमीढंगकाभोजनलगायागया, जबडॉ. खुरानाभोजनग्रहणकरनेकेलिएपहुंचेऔर वहांपश्चिमीढंगकाभोजनलगादेखा तोउन्हेंबड़ी हैरानीहुईऔरइसकाकारणपूँछा, तोकिसीसज्जननेआगेबढ़करबतायाकिहमनेसोचाकिआपबड़ेलम्बेसमयसेAmerica में रह रहेहैतोअबतकआपwestern food केअभ्यस्तहोचुकेहोंगेइसलिएआपकेलिएयेपश्चिमीभोजनकिव्यवस्थाकिगईहै,”

इस बातकोसुनकरडॉ. खुरानाबोले-“ नहींभाईऐसानहींहै, मैंअपनेघर,अपनेदेशकोभूलानहींहूँ, मुझेपश्चिमीखानानहींचाहिए, मुझेतोबाजरेकिमोटी-मोटीरोटियांऔरसरसोंकासागचाहिए, मैंअपनेघरआयाहूँ, मुझेमेहमाननासमझाजाये,”

भोज मेंउपस्थितसभीलोगडॉ. हरगोविन्दखुरानाकिइससादगीऔरअपनेपनपरमोहितहोगये/   


Did you like this inspiring article in Hindi? if yes, become a fan of this blog...please


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मैं घर आया हूँ मुझे मेहमान ना समझा जाये--"I have come home, i am not deemed guests" ( a motivational story in Hindi)




मैं घर आया हूँ मुझे मेहमान ना समझा जाये

I have come home, i am not deemed guests

I have come home, I am not deemed guests

डॉ. हरगोविन्द खुरानाभारतीयमूलकेscientist है, डॉ.हरगोविन्द खुरानाकाजन्मसन्1922मेंमुल्तानकेएकछोटेसेकस्बेरायपुरमें हुआथा, इनकेपितापटवारीथे, डॉ. खुरानाchildhood से ही कुशाग्रबुद्धिकेमालिकथे, उनकोपढ़नेकिबड़ीलगनथी,
Indian government नेडॉ. खुरानाकिलगनकोदेखतेहुएउन्हेंhigher education कि प्राप्तिकेलिएEngland भेजा/

England सेवेdoctorate किउपाधिलेकरIndia वापस आये, परदुर्भाग्यवश! India में डॉ. हरगोविन्दकोअपनेयोग्यकोईjob नहीं मिलसकी औरविवशहोकरउन्हें विदेशवापसजानापड़ा, अबडॉ. खुरानाएकअमरीकीनागरिकहै, उन्हेंवहांकिनागरिकताप्राप्तहै,
डॉ. खुरानानेआनुवांशिकीकिfield मेंबड़ामहत्वपूर्णयोगदानदियाहै, उनकोसन्1968 मेंऔषधिएवम्शरीरक्रियाविज्ञानमेंNobel price प्रदान कियागया/
डॉ. हरगोविन्दखुरानाAmerica में बस जरुरगयेथेपरवोअपनीमातृभूमिकोभूलेनहींथेवोअक्सरअवकाशमिलनेपरIndia अपनेदोस्तोंऔररिश्तेदारोंसेमिलनेआतेरहतेथे/
एक बारकिबातहैडॉ. खुरानाIndia आये, Delhi मेंउनकेस्वागतमेंएकमित्रनेभोजरखा, उनकेलिएdinning table पे पश्चिमीढंगकाभोजनलगायागया, जबडॉ. खुरानाभोजनग्रहणकरनेकेलिएपहुंचेऔर वहांपश्चिमीढंगकाभोजनलगादेखा तोउन्हेंबड़ी हैरानीहुईऔरइसकाकारणपूँछा, तोकिसीसज्जननेआगेबढ़करबतायाकिहमनेसोचाकिआपबड़ेलम्बेसमयसेAmerica में रह रहेहैतोअबतकआपwestern food केअभ्यस्तहोचुकेहोंगेइसलिएआपकेलिएयेपश्चिमीभोजनकिव्यवस्थाकिगईहै,”

इस बातकोसुनकरडॉ. खुरानाबोले-“ नहींभाईऐसानहींहै, मैंअपनेघर,अपनेदेशकोभूलानहींहूँ, मुझेपश्चिमीखानानहींचाहिए, मुझेतोबाजरेकिमोटी-मोटीरोटियांऔरसरसोंकासागचाहिए, मैंअपनेघरआयाहूँ, मुझेमेहमाननासमझाजाये,”

भोज मेंउपस्थितसभीलोगडॉ. हरगोविन्दखुरानाकिइससादगीऔरअपनेपनपरमोहितहोगये/   


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