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lab love-affection

Thomas Alva Edison - His Lab affection  

Famous scientist Thomas Alva Edison अपनी धुन के पक्के थे वो जिस कम को भी हाथ में लेते थे उसे पूरा किये बिना साँस नहीं लेते थे । Edison को काम करने का नशा था । वे एक बार अपनी धुन में जब प्रयोगशाला में घुस जाते थे तो प्रोग्शाला से जल्दी बाहर ही नहीं निकलते थे । उनको प्रोग्शाला में रहना इतना पसंद था की जब वो lab में घुस जाते तो वहीँ लैब में ही रम के रह जाते थे ।Edison के इस lab प्रेम से उनकी wife बहुत परेशान रहती थीं । काम के प्रति उनकी धुन से उनकी wife उनसे हमेशा चिढ़ी – चिढ़ी सी रहती थीं ।

एक बार तो Edison ने हद कर दी, वो एक बार वो अपने किसी experiment के लिए Laboratory में घुसे तो काफी दिनों तक बाहर निकले ही नहीं निकले । वे lab में ही पुर्णतः निवास कर रहे थे । फिर आखिरकार काफी दिनों बाद जब वह अपनी  Laboratory से बाहर आये, तो उनकी प्रिय पत्नी ने उनको सलाह दी –“ my dear, आप Night and day काम में लगे रहते हैं । आप थक जाते होंगे, कभी - कभार rest भी कर लिया करें । कभी तो छुट्टी कर लिया करें ।”

इस पर Edison बोले –“ लेकिन में छुट्टी ले कर जाऊं कहाँ ?”

wife बोली-“ my dear, जहाँ तुम्हारा मन चाहे ।“

“Okay! तो फिर मैं वहीँ जाता हूँ ।” यह कह कर Edison फिर से सीधे अपनी Favorite lab में घुस गये ।”    

Friend’s, आप को ये Thomas Alva Edison - His Lab affection motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये । 

One Request: Did you like this personal development base motivational story in Hindi? If yes, become a fan of this blog...please

अंत में आप सब readers को मेरा धन्यवाद!  



Thomas Alva Edison - His Lab affection- A inspirational true real life story in Hindi



lab love-affection

Thomas Alva Edison - His Lab affection  

Famous scientist Thomas Alva Edison अपनी धुन के पक्के थे वो जिस कम को भी हाथ में लेते थे उसे पूरा किये बिना साँस नहीं लेते थे । Edison को काम करने का नशा था । वे एक बार अपनी धुन में जब प्रयोगशाला में घुस जाते थे तो प्रोग्शाला से जल्दी बाहर ही नहीं निकलते थे । उनको प्रोग्शाला में रहना इतना पसंद था की जब वो lab में घुस जाते तो वहीँ लैब में ही रम के रह जाते थे ।Edison के इस lab प्रेम से उनकी wife बहुत परेशान रहती थीं । काम के प्रति उनकी धुन से उनकी wife उनसे हमेशा चिढ़ी – चिढ़ी सी रहती थीं ।

एक बार तो Edison ने हद कर दी, वो एक बार वो अपने किसी experiment के लिए Laboratory में घुसे तो काफी दिनों तक बाहर निकले ही नहीं निकले । वे lab में ही पुर्णतः निवास कर रहे थे । फिर आखिरकार काफी दिनों बाद जब वह अपनी  Laboratory से बाहर आये, तो उनकी प्रिय पत्नी ने उनको सलाह दी –“ my dear, आप Night and day काम में लगे रहते हैं । आप थक जाते होंगे, कभी - कभार rest भी कर लिया करें । कभी तो छुट्टी कर लिया करें ।”

इस पर Edison बोले –“ लेकिन में छुट्टी ले कर जाऊं कहाँ ?”

wife बोली-“ my dear, जहाँ तुम्हारा मन चाहे ।“

“Okay! तो फिर मैं वहीँ जाता हूँ ।” यह कह कर Edison फिर से सीधे अपनी Favorite lab में घुस गये ।”    

Friend’s, आप को ये Thomas Alva Edison - His Lab affection motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये । 

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अंत में आप सब readers को मेरा धन्यवाद!  





क्रोध  से अच्छा है क्रोध के  कारण को मिटा दे,

it has taken away due to anger is better than anger

It has taken away due to anger is better than anger

जूलियस सीज़र की कहानियाँ हम सब ने school- college में खूब पढ़ी हैं। आज में जूलियस सीज़र के जीवन की बातों को पुनः तरोताजा करने जा रही हूँ । कुछ लोगों के लिए  Julius Caesar की ये बाते पुरानी होंगी तो कुछ लोगों के लिए नयी; क्योकिं कुछ लोगों ने Julius Caesar  को अच्छे से पढ़ा होगा तो कुछ लोगों ने जूलियर के बारे में सुना तो होगा पर ज्यादा पढ़ा नहीं होगा,या फिर पढ़ कर भूल गये होंगे। आज में जूलियर सीजर की life की एक truth event को आप के साथ share करने जा रही हूँ ।     

जूलियस सीज़र एक history famous सम्राट है। युवावस्था में सीज़र को भीषण संघर्षों से गुजरना पड़ा । एक सैनिक से सम्राट बनने तक का सफ़र बहुत ही दिलचस्प रहा । जूलियस सीज़र का जन्म 101 ई. पू. में एक अभिजात्यवादी रोमन कुल में हुआ था। इस कुल के लोग स्वयं को Venus Goddess का वंशज मानते थे । जूलियस सीज़र ने अपने आप को एक तानाशाह के रूप में स्थापित कर किया था । उसके राज्य में कहने को तो सारे प्रसाशनिक निर्णय रोमन सीनेट की बैठक में लिए जाते थे परन्तु राज्यसत्ता का मुख्य केंद्र जूलियस सीज़र का निवास स्थान ही होता था । जहाँ से वो अपनी सत्ता को चलाता व control करता था ।

जूलियस सीज़र एक तानाशाह राजा तो था पर उसे अपने गुस्से पर control करना बहुत ही अच्छे से आता था । और शायद यही कारण था की वो एक सैनिक पद से सम्राट के पद तक का सफ़र तय कर पाया । एक बार की बात है जूलियस सीज़र को कुछ पत्रों का एक पुलिंदा मिला जिसे उसके एक विरोधी ने सीज़र के लिए लिखा था । उन्हें देख कर सीज़र को क्रोध आ रहा था। सीज़र ने उनको बिना पढ़े ही जला दिया।

यह देखकर सीज़र के एक मित्र ने उनसे कहा  –“ आपने ये पत्र क्यों जला दिए। आप ने इन पत्रों को जला कर अच्छा नहीं किया । आप को इन दस्तावेजों को सभाल कर रखना चाहिए, अपने शत्रु के प्रमाण के रूप में ये पत्र अच्छे दस्तावेज साबित हो सकते हैं ।”  

इस पर सीज़र ने अपने मित्र से बहुत ही संयत और सधे शब्दों में कहा –“ मित्र तुम मेरे शुभचिंतक को इसके लिए धन्यवाद! यदपि मैं कोधित हूँ पर अपने क्रोध के प्रति सदैव सतर्क रहता हूँ, और उसे नियंत्रित करता हूँ क्योंकि मेरी दृष्टि में क्रोध को तो ख़तम नहीं किया जा सकता वो तो आ ही जाता है। इसलिए मैं क्रोध के कारण को ही मिटा देना उचित समझता हूँ ।”      
   
Anger is a natural reaction, it is necessary to regulate,
It has taken away due to anger is better than anger


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It has taken away due to anger is better than anger- a real life true motivational story in Hindi



क्रोध  से अच्छा है क्रोध के  कारण को मिटा दे,

it has taken away due to anger is better than anger

It has taken away due to anger is better than anger

जूलियस सीज़र की कहानियाँ हम सब ने school- college में खूब पढ़ी हैं। आज में जूलियस सीज़र के जीवन की बातों को पुनः तरोताजा करने जा रही हूँ । कुछ लोगों के लिए  Julius Caesar की ये बाते पुरानी होंगी तो कुछ लोगों के लिए नयी; क्योकिं कुछ लोगों ने Julius Caesar  को अच्छे से पढ़ा होगा तो कुछ लोगों ने जूलियर के बारे में सुना तो होगा पर ज्यादा पढ़ा नहीं होगा,या फिर पढ़ कर भूल गये होंगे। आज में जूलियर सीजर की life की एक truth event को आप के साथ share करने जा रही हूँ ।     

जूलियस सीज़र एक history famous सम्राट है। युवावस्था में सीज़र को भीषण संघर्षों से गुजरना पड़ा । एक सैनिक से सम्राट बनने तक का सफ़र बहुत ही दिलचस्प रहा । जूलियस सीज़र का जन्म 101 ई. पू. में एक अभिजात्यवादी रोमन कुल में हुआ था। इस कुल के लोग स्वयं को Venus Goddess का वंशज मानते थे । जूलियस सीज़र ने अपने आप को एक तानाशाह के रूप में स्थापित कर किया था । उसके राज्य में कहने को तो सारे प्रसाशनिक निर्णय रोमन सीनेट की बैठक में लिए जाते थे परन्तु राज्यसत्ता का मुख्य केंद्र जूलियस सीज़र का निवास स्थान ही होता था । जहाँ से वो अपनी सत्ता को चलाता व control करता था ।

जूलियस सीज़र एक तानाशाह राजा तो था पर उसे अपने गुस्से पर control करना बहुत ही अच्छे से आता था । और शायद यही कारण था की वो एक सैनिक पद से सम्राट के पद तक का सफ़र तय कर पाया । एक बार की बात है जूलियस सीज़र को कुछ पत्रों का एक पुलिंदा मिला जिसे उसके एक विरोधी ने सीज़र के लिए लिखा था । उन्हें देख कर सीज़र को क्रोध आ रहा था। सीज़र ने उनको बिना पढ़े ही जला दिया।

यह देखकर सीज़र के एक मित्र ने उनसे कहा  –“ आपने ये पत्र क्यों जला दिए। आप ने इन पत्रों को जला कर अच्छा नहीं किया । आप को इन दस्तावेजों को सभाल कर रखना चाहिए, अपने शत्रु के प्रमाण के रूप में ये पत्र अच्छे दस्तावेज साबित हो सकते हैं ।”  

इस पर सीज़र ने अपने मित्र से बहुत ही संयत और सधे शब्दों में कहा –“ मित्र तुम मेरे शुभचिंतक को इसके लिए धन्यवाद! यदपि मैं कोधित हूँ पर अपने क्रोध के प्रति सदैव सतर्क रहता हूँ, और उसे नियंत्रित करता हूँ क्योंकि मेरी दृष्टि में क्रोध को तो ख़तम नहीं किया जा सकता वो तो आ ही जाता है। इसलिए मैं क्रोध के कारण को ही मिटा देना उचित समझता हूँ ।”      
   
Anger is a natural reaction, it is necessary to regulate,
It has taken away due to anger is better than anger


Friend’s, आप को मेरी, “It has taken away due to anger is better than anger real life true motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये । 

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Intrepidity of Gopal Krishna Gokhale 



Intrepidity of Gopal Krishna Gokhale – a real life true story

गोपाल कृष्ण गोखले की निडरता 

गोपाल कृष्ण गोखले एक ऐसा नाम जिसे अंग्रेज भी बड़ी इज्जत से लेते थे।एक ऐसे स्वाध्यायी व विद्वान जिनके बारे में स्वयं उस समय के भारतीय कमांडर –इन चीफ किचनर ने कहा था –“गोखले ने यदी कोई अंग्रेजी पुस्तक नहीं पड़गी है तो अवश्य वह पढ़ने योग्य होगी ही नहीं

गोपाल कृष्ण गोखले एक ऐसी विभूति जिसने भारतीय जन-जीवन में स्वाधीनता का मन्त्र ऐसा फूका कि अंग्रेज हिल गये । एक ऐसे राजनीतिज्ञ जिन्हें गाँधी जी भी अपना राजनीतिक गुरु मानते थे और उनसे advice लेते थे ।

गोपाल कृष्ण गोखले जब छोटे थे तभी से उनमें निडरता विद्वत्ता के गुण नज़र आते थे । एक बार वो school में थे वहाँ पर उनसे बड़ी age के एक boy ने उनका हाथ तेजी से पकड़ लिया और उनको डारते हुए बोला; क्या तुझे मुझ से डर नहीं लगता में बड़ा हूँ तुम्हारे साथ कुछ भी कर सकता हूँ इस पर गोपाल कृष्ण गोखले बोले – “मैं तो अंग्रेजों से भी नहीं डरता तो तुमसे क्यों कर डरूं तुम तो अपने हो।”  

इस पर उस बड़े लड़के ने गोपाल की आखों में आखें गड़ाते हुए बोला –“ क्या तुझे अंग्रेजों से डर नहीं लगता, उनसे तो सब बच्चे डरते हैं।” इस पर नन्हें गोपाल ने उसकी आखों में आखें डालते हुए कहा –“मैं भला उन अंग्रेजों से क्यों डरूं ?”

तभी वहाँ एक अन्य लड़का आ गया और गोपाल का मजाक उड़ाते हुए बोला, अरे भाई! तुमने गोपाल से गलत question पूछा लिया है । तुमको पूछना चाहिए था। गोपाल ! क्या अंग्रेज तुम से डरते हैं ? तब गोपाल बोलता, हाँ अंग्रेज मुझसे डरते हैं। और ये कह कर वो लड़का हँसने लगा।  

इस पर उस लड़के से गोपाल बड़ी ही सहजता से बोले – “हाँ भैया तुम बिल्कुल सही कह रहे हो ! अंग्रेज हम सभी से डरते हैं, सभी देशवासियों से डरते हैं, हमारे village में रहने वोलों से डरते हैं। तभी तो वे हमेशा घोड़े पर सवार होकर हाथ में चाबुक लेकर चलते हैं  और छोटी- छोटी बात पर हमारी गरीब , निर्दोष जनता पर चाबुक चला देते हैं । वे हमे डराते हैं क्योंकि वो हमसे डरते हैं।”

वहां खड़े दूसरे लड़के- लड़कियां गोपाल कि बात सुन कर, उसकी तारीफ करने लगे और तालियाँ बजाते हुए बोले वाह- वाह गोपाल तुम सच में निडर हो। तुम्हारे विचार बहुत उच्च हैं ।

तभी पीछे से एक आवाज आयी- गोपाल! यहाँ आओ। सब ने चौक के देखा तो पीछे school के head master खड़े थे । सब ने उनको wish किया और चुप चाप खड़े हो गये ।

head master के हाथ में एक छड़ी थी जिससे इशारा कर के उन्होंने गोपाल को बुलाया था । सभी बच्चे डर गये कि अब गोपाल की ख़ैर नहीं । कुछ बच्चे सोचने लगे, “अच्छा ही है कि गोपाल पिटे। पिददा सा है और बड़ी- बड़ी बाते करता है न जाने खुद को क्या समझता है। हमेशा, छोटे मुह बड़ी बात।”  
  
पर गोपाल बिना डरे, बड़ी निर्भीकता के साथ head master के पास गये और head master को wish करते हुए उनके सामने खड़े हो गये और बोले जी guru जी, head master ने उनको शाबाशी देते हुए कहा- “शाबाश मेरे बच्चे।” और गोपाल को अपने सीने से लगा लिया। और उसके कंधे थपथपाते हुए बोले-“ मुझे तुम पर गर्व है और आने वाला कल भी तुम पर गर्व करेगा। तुम अवश्य ही देश का नया इतिहास लिखोगे।”



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Intrepidity of Gopal Krishna Gokhale – a freedom fighters real life true story in Hindi




Intrepidity of Gopal Krishna Gokhale 



Intrepidity of Gopal Krishna Gokhale – a real life true story

गोपाल कृष्ण गोखले की निडरता 

गोपाल कृष्ण गोखले एक ऐसा नाम जिसे अंग्रेज भी बड़ी इज्जत से लेते थे।एक ऐसे स्वाध्यायी व विद्वान जिनके बारे में स्वयं उस समय के भारतीय कमांडर –इन चीफ किचनर ने कहा था –“गोखले ने यदी कोई अंग्रेजी पुस्तक नहीं पड़गी है तो अवश्य वह पढ़ने योग्य होगी ही नहीं

गोपाल कृष्ण गोखले एक ऐसी विभूति जिसने भारतीय जन-जीवन में स्वाधीनता का मन्त्र ऐसा फूका कि अंग्रेज हिल गये । एक ऐसे राजनीतिज्ञ जिन्हें गाँधी जी भी अपना राजनीतिक गुरु मानते थे और उनसे advice लेते थे ।

गोपाल कृष्ण गोखले जब छोटे थे तभी से उनमें निडरता विद्वत्ता के गुण नज़र आते थे । एक बार वो school में थे वहाँ पर उनसे बड़ी age के एक boy ने उनका हाथ तेजी से पकड़ लिया और उनको डारते हुए बोला; क्या तुझे मुझ से डर नहीं लगता में बड़ा हूँ तुम्हारे साथ कुछ भी कर सकता हूँ इस पर गोपाल कृष्ण गोखले बोले – “मैं तो अंग्रेजों से भी नहीं डरता तो तुमसे क्यों कर डरूं तुम तो अपने हो।”  

इस पर उस बड़े लड़के ने गोपाल की आखों में आखें गड़ाते हुए बोला –“ क्या तुझे अंग्रेजों से डर नहीं लगता, उनसे तो सब बच्चे डरते हैं।” इस पर नन्हें गोपाल ने उसकी आखों में आखें डालते हुए कहा –“मैं भला उन अंग्रेजों से क्यों डरूं ?”

तभी वहाँ एक अन्य लड़का आ गया और गोपाल का मजाक उड़ाते हुए बोला, अरे भाई! तुमने गोपाल से गलत question पूछा लिया है । तुमको पूछना चाहिए था। गोपाल ! क्या अंग्रेज तुम से डरते हैं ? तब गोपाल बोलता, हाँ अंग्रेज मुझसे डरते हैं। और ये कह कर वो लड़का हँसने लगा।  

इस पर उस लड़के से गोपाल बड़ी ही सहजता से बोले – “हाँ भैया तुम बिल्कुल सही कह रहे हो ! अंग्रेज हम सभी से डरते हैं, सभी देशवासियों से डरते हैं, हमारे village में रहने वोलों से डरते हैं। तभी तो वे हमेशा घोड़े पर सवार होकर हाथ में चाबुक लेकर चलते हैं  और छोटी- छोटी बात पर हमारी गरीब , निर्दोष जनता पर चाबुक चला देते हैं । वे हमे डराते हैं क्योंकि वो हमसे डरते हैं।”

वहां खड़े दूसरे लड़के- लड़कियां गोपाल कि बात सुन कर, उसकी तारीफ करने लगे और तालियाँ बजाते हुए बोले वाह- वाह गोपाल तुम सच में निडर हो। तुम्हारे विचार बहुत उच्च हैं ।

तभी पीछे से एक आवाज आयी- गोपाल! यहाँ आओ। सब ने चौक के देखा तो पीछे school के head master खड़े थे । सब ने उनको wish किया और चुप चाप खड़े हो गये ।

head master के हाथ में एक छड़ी थी जिससे इशारा कर के उन्होंने गोपाल को बुलाया था । सभी बच्चे डर गये कि अब गोपाल की ख़ैर नहीं । कुछ बच्चे सोचने लगे, “अच्छा ही है कि गोपाल पिटे। पिददा सा है और बड़ी- बड़ी बाते करता है न जाने खुद को क्या समझता है। हमेशा, छोटे मुह बड़ी बात।”  
  
पर गोपाल बिना डरे, बड़ी निर्भीकता के साथ head master के पास गये और head master को wish करते हुए उनके सामने खड़े हो गये और बोले जी guru जी, head master ने उनको शाबाशी देते हुए कहा- “शाबाश मेरे बच्चे।” और गोपाल को अपने सीने से लगा लिया। और उसके कंधे थपथपाते हुए बोले-“ मुझे तुम पर गर्व है और आने वाला कल भी तुम पर गर्व करेगा। तुम अवश्य ही देश का नया इतिहास लिखोगे।”



Friend’s, आप को मेरी, “Intrepidity of Gopal Krishna Gokhale – a real life true story” motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये ।   


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Great saint- health is a golden wealth 

Health is a Wealth
एक बार राजा प्रसेनजीत बहुत बीमार हुए । उनकी बीमारी का कारण उनका असंयमित आहार था । उनको भांति- भांति के सुस्वादु (Delicious) भोजन आहार में भाते थे । उनका अपनी जिव्हा पर कोई नियन्त्रण नहीं था । वे स्वाद के अनुसार ही भोजन करते थे । वे स्वास्थ्य को किनारे रख कर सिर्फ भोजन के स्वाद को ही महत्व देते और स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते । इस कारण उनका शरीर (body) बीमार हो चला था । अतः उनका अपना शरीर रोगों का घर बनता चला गया । वो इतने बीमार हुए कि उनके सभी राज्य वैद्य (doctor) हार गये पर उनको स्वस्थ न कर पाए ।
वे अपने इस दुःख का समाधान पाने के लिए Mahatma Buddha के पास गये। Great Buddha ने king प्रसेनजीत को देखते ही जान लिया की वो उनके पास किस लिए आये हैं । पर भगवान बुद्ध जानते थे की राजा प्रसेनजीत को इस समय उपदेश देना व्यर्थ है क्योंकि उनकी जीव्हा को स्वादिष्ट भोजन की लत जो लगी है वो किसी उपदेश से छूटने वाली नहीं है ।
इसलिए God buddha ने राजा प्रसेनजीत को कोई उपदेश देने के बजाय, राजा के अंगरक्षक से कहा- “ तुम्हारा काम क्या है ?”  अंगरक्षक ने God Buddha से कहा –“ राजा का अंगरक्षक होने के नाते मैं राजा की रक्षा करता हूँ ।” यह सुन कर great saint buddha ने अंगरक्षक से कहा –“ तुम्हें दिखाई नहीं देता, अंग रोगी हुआ जा रहा है । इसकी रक्षा करो । रोको राजा को । जब भी आवश्यकता से अधिक खाएं, जबरदस्ती रोक दो ।” अंगरक्षक God Buddha से बोला –“ राजा हमें फाँसी पर चढ़ा देंगे ।” Great Buddha बोले –“ तुम कर्त्तव्यनिष्ठ बन जाओ । अपने प्राणों की बलि भी देनी पड़े तो पहले कर्त्तव्य पूरा करो ।” यह सुन कर अंगरक्षक ने कहा –“ आपका आशीष हम पर है तो हम अपने जीवन की वेदी पर भी इनके जीवन को बचायेंगे । राजा स्वस्थ होंगे तो राज्य की रक्षा होगी ।”

Healthy food

फिर अंगरक्षक ने श्री बुद्ध की आज्ञा का पालन किया । one month बाद राजा जब पुनः God Buddha से मिलने आये तो वो अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ थे । फिर धीरे – धीरे राजा पूर्णत: स्वस्थ हो गये । ऐसा तब संभव हुआ जब राजा ने अपनी वृत्तियों पर संयम रखा । उन्होंने जब अपनी जिव्हा के स्वाद पर नियंत्रण कर स्वाद को छोड़ कर स्वास्थ्य के लिए भोजन करना प्रारम्भ किया तो उनको स्वास्थ्य रूपी धन प्राप्त हुआ ।

Friend’s, आप को मेरा “health is a wealth” motivational article in Hindi में कैसा लगा ? क्या ये story सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बतायेA  
       
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Health is a Wealth- a motivational article in Hindi


Great saint- health is a golden wealth 

Health is a Wealth
एक बार राजा प्रसेनजीत बहुत बीमार हुए । उनकी बीमारी का कारण उनका असंयमित आहार था । उनको भांति- भांति के सुस्वादु (Delicious) भोजन आहार में भाते थे । उनका अपनी जिव्हा पर कोई नियन्त्रण नहीं था । वे स्वाद के अनुसार ही भोजन करते थे । वे स्वास्थ्य को किनारे रख कर सिर्फ भोजन के स्वाद को ही महत्व देते और स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेते । इस कारण उनका शरीर (body) बीमार हो चला था । अतः उनका अपना शरीर रोगों का घर बनता चला गया । वो इतने बीमार हुए कि उनके सभी राज्य वैद्य (doctor) हार गये पर उनको स्वस्थ न कर पाए ।
वे अपने इस दुःख का समाधान पाने के लिए Mahatma Buddha के पास गये। Great Buddha ने king प्रसेनजीत को देखते ही जान लिया की वो उनके पास किस लिए आये हैं । पर भगवान बुद्ध जानते थे की राजा प्रसेनजीत को इस समय उपदेश देना व्यर्थ है क्योंकि उनकी जीव्हा को स्वादिष्ट भोजन की लत जो लगी है वो किसी उपदेश से छूटने वाली नहीं है ।
इसलिए God buddha ने राजा प्रसेनजीत को कोई उपदेश देने के बजाय, राजा के अंगरक्षक से कहा- “ तुम्हारा काम क्या है ?”  अंगरक्षक ने God Buddha से कहा –“ राजा का अंगरक्षक होने के नाते मैं राजा की रक्षा करता हूँ ।” यह सुन कर great saint buddha ने अंगरक्षक से कहा –“ तुम्हें दिखाई नहीं देता, अंग रोगी हुआ जा रहा है । इसकी रक्षा करो । रोको राजा को । जब भी आवश्यकता से अधिक खाएं, जबरदस्ती रोक दो ।” अंगरक्षक God Buddha से बोला –“ राजा हमें फाँसी पर चढ़ा देंगे ।” Great Buddha बोले –“ तुम कर्त्तव्यनिष्ठ बन जाओ । अपने प्राणों की बलि भी देनी पड़े तो पहले कर्त्तव्य पूरा करो ।” यह सुन कर अंगरक्षक ने कहा –“ आपका आशीष हम पर है तो हम अपने जीवन की वेदी पर भी इनके जीवन को बचायेंगे । राजा स्वस्थ होंगे तो राज्य की रक्षा होगी ।”

Healthy food

फिर अंगरक्षक ने श्री बुद्ध की आज्ञा का पालन किया । one month बाद राजा जब पुनः God Buddha से मिलने आये तो वो अपेक्षाकृत अधिक स्वस्थ थे । फिर धीरे – धीरे राजा पूर्णत: स्वस्थ हो गये । ऐसा तब संभव हुआ जब राजा ने अपनी वृत्तियों पर संयम रखा । उन्होंने जब अपनी जिव्हा के स्वाद पर नियंत्रण कर स्वाद को छोड़ कर स्वास्थ्य के लिए भोजन करना प्रारम्भ किया तो उनको स्वास्थ्य रूपी धन प्राप्त हुआ ।

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