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 दो दोस्त और श्मशान घाट
two friends and their ambitions
 Two friends and cremation grounds

एक गाँव था वहाँ दो लड़के तोलू और मोलू रहते थे, दोनों की life और behavior में जमीन- आसमान का अंतर था । तोलू सीधा - साधा जीवन जीने वाला और थोड़े में संतोष करने वाला था ।

वहीँ मोलू बड़े- बड़े सपने देखने वाला था, उसे जो भी मिले उसके लिए कम था । उसे अपनी पूरी life में कभी संतोष नहीं हुआ । वो हमेशा money कमाने और बढ़ाने के बारे में ही सोचता रहता ।

तोलू और मोलू दोनों के behavior में इतना अंतर होने के बाद भी दोनों में बड़ी मित्रता थी । वो अपने गाँव से एक साथ higher education के लिए एक साथ शहर आये । और वहाँ के college में admission देखने लगे ।

तोलू ऐसा college ढूंढ रहा था जहाँ पढाई अच्छी होती हो और पढाई का खर्च भी कम हो, वहीँ मोलू एक हाई- फाई college में admission लेना चाहता था । और दोनों ने अपने – अपने पसंद के college में admission ले लिया ।

तोलू ने जीवनोपयोगी और सामाजिक subject चुने वहीँ पर मोलू ने अधिक धनवान और भौतिक सुखों को दिलाने वाले subject चुनें ।

फिर कुछ समय बाद तोलू और मोलू दोनों ने अपनी – अपनी शिक्षा पूर्ण कर अपने – अपने जीवन में आगे बढ़ गये।

तोलू ने अपनी शिक्षा पूरी कर के अपने गाँव के विकास के लिए एक छोटा सा school गाँव में open किया और स्वयं वहां पर teaching करने लगा । इस प्रकार अपने गाँव के लोगों की सेवा करता हुवा, बड़े संतोष और धीरज से अपना जीवन चलता रहा । और जीवन भर मस्त और आनद से रहा ।

उधर मोलू ने शहर में ही बड़ा business डाला और नयी - नयी company खोलता रहा और अपने धन को आगे बढ़ाने के और ज्यादा से ज्यादा सुख प्राप्ति के उपाय ही ढूंढता रहा । वो हमेशा rupees के, लेन – देन के हिसाब –किताबों में ही उलझा रहा । उसे कभी अपनी life में संतोष की प्राप्ति नहीं हुई ।

फिर उनकी life में एक दिन ऐसा आया कि दोनों की एक मुलाकात एक बार फिर हुई । पर ये मुलाकात श्मशान घाट पर तब हुई जब दोनों अपनी अंतिम यात्रा पर थे ।

तोलू और मोलू दोनों श्मशान घाट पर शव शय्या पर पड़े थे और चिता पर जाने का इंतजार कर रहे थे ।

जब तोलू ने मोलू को देखा तो वो उसे देख कर मुस्कराने लगा ।

इस पर मोलू ने तोलू से पूंछा –“ तू इस तरह से मुस्कुरा क्यों रहा है । हम दोनों ही तो एक ही स्थिति में हैं ।”

इस पर तोलू ने कहाँ –“ नहीं मेरे भाई हम दोनों एक ही स्थिति में नहीं हैं।”
इस पर मोलू ने फिर पूँछा वो कैसे...?

तोलू ने कहा –“ मोलू तुम जीवन भर भौतिक सुख – साधन के पीछे भागते रहे हो और दिन- रात पैसों के हिसाब – किताब में ही उलझे रहे यहाँ तक आज जब तुम्हारे जीवन की अंतिम यात्रा है तब भी तुम पैसों के हिसाब – किताब में ही उलझे हो । श्मशान घाट पर भी जीवन के सुख – वैभव का, रूपये – पैसे की कामना में ही लिप्त हो । ये जानते हुए भी कि यहाँ से आगे कुछ भी साथ नहीं जाता ।”  

फिर मोलू ने कहा मित्र और तुम...?

इस पर तोलू बोला – “ मैने अपना जीवन सदाचार और सेवा में लगाया जो थोड़ा मिला उसमे संतोष किया और जीवन के हर पल को मस्ती और आनंद के साथ जिया । मैं जीवन भर मस्त और प्रसन्न रहा और अब जब सब से अंतिम विदा ले रहाँ हूँ तो भी वही प्रसन्नता और वही संतोष है ।”

अच्छा भाई मोलू मैं अब चला। ये कह कर तोलू चला गया ।

The final journey of life

पर मोलू फिर से अपने हिसाब – किताब की बातों में उलझ गया ।

friends, सच कहते है कि व्यक्ति का जीवन जैसा होता है, और वो अपने जीवन भर में जैसा आचरण करता है । उसका आहार – विहार, उसका आचरण जीवन के बाद भी मौजूद रहता है । व्यक्ति का आचरण और संस्कार उसकी मृत्यु आ जाने के बाद भी उसका पीछा नहीं छोड़ते ।  

इसलिए दोस्तों हमारा मानना है कि हमें हमेशा जीवन में संस्कारों पर ध्यान देना चाहिए । क्योकि जैसे संस्कार जीवन में आते जायेंगे, हमारा जीवन भी वैसा ही बनता चला जायेगा।     

   

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Two friends and cremation grounds - a inspirational story in Hindi-दो दोस्त और श्मशान घाट



 दो दोस्त और श्मशान घाट
two friends and their ambitions
 Two friends and cremation grounds

एक गाँव था वहाँ दो लड़के तोलू और मोलू रहते थे, दोनों की life और behavior में जमीन- आसमान का अंतर था । तोलू सीधा - साधा जीवन जीने वाला और थोड़े में संतोष करने वाला था ।

वहीँ मोलू बड़े- बड़े सपने देखने वाला था, उसे जो भी मिले उसके लिए कम था । उसे अपनी पूरी life में कभी संतोष नहीं हुआ । वो हमेशा money कमाने और बढ़ाने के बारे में ही सोचता रहता ।

तोलू और मोलू दोनों के behavior में इतना अंतर होने के बाद भी दोनों में बड़ी मित्रता थी । वो अपने गाँव से एक साथ higher education के लिए एक साथ शहर आये । और वहाँ के college में admission देखने लगे ।

तोलू ऐसा college ढूंढ रहा था जहाँ पढाई अच्छी होती हो और पढाई का खर्च भी कम हो, वहीँ मोलू एक हाई- फाई college में admission लेना चाहता था । और दोनों ने अपने – अपने पसंद के college में admission ले लिया ।

तोलू ने जीवनोपयोगी और सामाजिक subject चुने वहीँ पर मोलू ने अधिक धनवान और भौतिक सुखों को दिलाने वाले subject चुनें ।

फिर कुछ समय बाद तोलू और मोलू दोनों ने अपनी – अपनी शिक्षा पूर्ण कर अपने – अपने जीवन में आगे बढ़ गये।

तोलू ने अपनी शिक्षा पूरी कर के अपने गाँव के विकास के लिए एक छोटा सा school गाँव में open किया और स्वयं वहां पर teaching करने लगा । इस प्रकार अपने गाँव के लोगों की सेवा करता हुवा, बड़े संतोष और धीरज से अपना जीवन चलता रहा । और जीवन भर मस्त और आनद से रहा ।

उधर मोलू ने शहर में ही बड़ा business डाला और नयी - नयी company खोलता रहा और अपने धन को आगे बढ़ाने के और ज्यादा से ज्यादा सुख प्राप्ति के उपाय ही ढूंढता रहा । वो हमेशा rupees के, लेन – देन के हिसाब –किताबों में ही उलझा रहा । उसे कभी अपनी life में संतोष की प्राप्ति नहीं हुई ।

फिर उनकी life में एक दिन ऐसा आया कि दोनों की एक मुलाकात एक बार फिर हुई । पर ये मुलाकात श्मशान घाट पर तब हुई जब दोनों अपनी अंतिम यात्रा पर थे ।

तोलू और मोलू दोनों श्मशान घाट पर शव शय्या पर पड़े थे और चिता पर जाने का इंतजार कर रहे थे ।

जब तोलू ने मोलू को देखा तो वो उसे देख कर मुस्कराने लगा ।

इस पर मोलू ने तोलू से पूंछा –“ तू इस तरह से मुस्कुरा क्यों रहा है । हम दोनों ही तो एक ही स्थिति में हैं ।”

इस पर तोलू ने कहाँ –“ नहीं मेरे भाई हम दोनों एक ही स्थिति में नहीं हैं।”
इस पर मोलू ने फिर पूँछा वो कैसे...?

तोलू ने कहा –“ मोलू तुम जीवन भर भौतिक सुख – साधन के पीछे भागते रहे हो और दिन- रात पैसों के हिसाब – किताब में ही उलझे रहे यहाँ तक आज जब तुम्हारे जीवन की अंतिम यात्रा है तब भी तुम पैसों के हिसाब – किताब में ही उलझे हो । श्मशान घाट पर भी जीवन के सुख – वैभव का, रूपये – पैसे की कामना में ही लिप्त हो । ये जानते हुए भी कि यहाँ से आगे कुछ भी साथ नहीं जाता ।”  

फिर मोलू ने कहा मित्र और तुम...?

इस पर तोलू बोला – “ मैने अपना जीवन सदाचार और सेवा में लगाया जो थोड़ा मिला उसमे संतोष किया और जीवन के हर पल को मस्ती और आनंद के साथ जिया । मैं जीवन भर मस्त और प्रसन्न रहा और अब जब सब से अंतिम विदा ले रहाँ हूँ तो भी वही प्रसन्नता और वही संतोष है ।”

अच्छा भाई मोलू मैं अब चला। ये कह कर तोलू चला गया ।

The final journey of life

पर मोलू फिर से अपने हिसाब – किताब की बातों में उलझ गया ।

friends, सच कहते है कि व्यक्ति का जीवन जैसा होता है, और वो अपने जीवन भर में जैसा आचरण करता है । उसका आहार – विहार, उसका आचरण जीवन के बाद भी मौजूद रहता है । व्यक्ति का आचरण और संस्कार उसकी मृत्यु आ जाने के बाद भी उसका पीछा नहीं छोड़ते ।  

इसलिए दोस्तों हमारा मानना है कि हमें हमेशा जीवन में संस्कारों पर ध्यान देना चाहिए । क्योकि जैसे संस्कार जीवन में आते जायेंगे, हमारा जीवन भी वैसा ही बनता चला जायेगा।     

   

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एक घड़े की यात्रा

A beautiful Pitcher
Journey of a Pitcher

एक कुम्हार था वह बहुत ही सुंदर – सुंदर मिट्टी के बर्तन बनाता था । एक दिन उसने एक घड़ा बनाया और उस पर उसने विभिन्न रंगों से बहुत ही सुंदर चित्रकारी कर दी । घड़ा इतना सुंदर बना था कि उसे देख स्वयं कुम्हार भी अचम्भित था कि उसकी रचना इतनी सुंदर बन सकती है कि सब का मन मोह ले ।

कुम्हार ने pitcher बेचने के लिए बाहर रखे दूसरे बर्तनों के साथ उसे रख दिया । एक साहूकार कुम्हार से बर्तन खरीदने आया, तो बर्तनों के बीच रखे उस घड़े को देखता ही रह गया और कुम्हार से बोला ये घड़ा तो बड़ा ही सुंदर और अदभुत है इसे इसतरह तुमने क्यों रखा है ? तब कुम्हार ने कहा श्रीमान् जी इसे मैने बेचने के लिए रखा है। इस पर साहूकार बोला अरे ! मैने इतना सुंदर घड़ा अपने जीवन में कभी नहीं देखा । इतने सुंदर घड़े को बेच कर तुझे कितना rupeeya मिलेगा... जा इसे राजा को भेट कर दे, वो इस सुंदर घड़े को देख कर अति प्रसन्न होंगे और तुम्हें इनाम में ढेर सारा gold भी देंगे, जिससे तेरा सारा जीवन सवंर जायेगा ।

Journey of a Pitcher 

घड़ा ये सब देख और सुन रहा था, घड़े को कुम्हार और साहूकार की इस प्रसंशा ने मोहित कर दिया । उसे खुद पर गर्व हो आया, कि उससे सुंदर घड़ा कभी नहीं बना और वो संसार का सब से सुंदर घड़ा है । वह अपने दूसरे बर्तन साथियों से बोला, देखो में कितना सौंदर्यवान हूँ कि मेरा रचियता मुझे raja को भेट करेगा और मैं अब raja के Palace में शान से चिरकाल तक विराजित रहूँगा और तुम सब बेच दिए जाओगे, तुम सब को तो यह भी पता नहीं की तुम्हारा new owner तुम सब के साथ कैसा व्यवहार करेगा ।”

तभी आँधी चली और घड़ा लुढका और टुकड़े - टुकड़े हो कर बिखर गया । और जब वह टुकड़े – टुकड़े हो कर बिखरा तो वह God को कोसने लगा –“ तु कितना निष्ठुर है व तुमसे मेरी ख़ुशी देखी नहीं गयी, जो तूने मेरे साथ ऐसा किया । तू  सदा से ऐसा ही निर्दयी है । तू हमेशा हँसते – खेलते लोंगों के अस्तित्व को हमेशा के लिए मिटा देता है ।”

earth mother 

Pitcher टुकड़े - टुकड़े हो कर, जिन धरती mata की गोद में जा गिरा था । उनने घड़े की बात सुनकर घड़े से कहा – पुत्र शांत हो जाओ, तुम मुझसे ही जन्मे हो , इसलिए तुमको समझा रही हूँ । जब तुम को कुम्हार ने गढ़ा तो तुम्हें घड़े का रूप मिला और तुम उपयोगी बने और तुमको आनंद प्राप्त हुआ, पर जब तुम गिर कर टुकड़े – टुकड़े हुए हो तो तुम्हें नहीं पता तुमको क्या मिला... तुम किस अनंतता में विलीन हो गये हो । इस अनंत से मिलना तो स्वयं में एक वरदान है इसे स्वीकार करो । पुत्र ! तुम्हारा अहंकार से पूरित ये शरीर मिटा है न कि तुम्हारी आत्मा, वो अमिट है, अनंत है ।”

धरती माँ की ये बात सुन घड़े का क्षोभ मिट गया और उसे शांति मिली ।
        
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Journey of a Pitcher- एक घड़े की यात्रा- it is a motivational story in Hindi



एक घड़े की यात्रा

A beautiful Pitcher
Journey of a Pitcher

एक कुम्हार था वह बहुत ही सुंदर – सुंदर मिट्टी के बर्तन बनाता था । एक दिन उसने एक घड़ा बनाया और उस पर उसने विभिन्न रंगों से बहुत ही सुंदर चित्रकारी कर दी । घड़ा इतना सुंदर बना था कि उसे देख स्वयं कुम्हार भी अचम्भित था कि उसकी रचना इतनी सुंदर बन सकती है कि सब का मन मोह ले ।

कुम्हार ने pitcher बेचने के लिए बाहर रखे दूसरे बर्तनों के साथ उसे रख दिया । एक साहूकार कुम्हार से बर्तन खरीदने आया, तो बर्तनों के बीच रखे उस घड़े को देखता ही रह गया और कुम्हार से बोला ये घड़ा तो बड़ा ही सुंदर और अदभुत है इसे इसतरह तुमने क्यों रखा है ? तब कुम्हार ने कहा श्रीमान् जी इसे मैने बेचने के लिए रखा है। इस पर साहूकार बोला अरे ! मैने इतना सुंदर घड़ा अपने जीवन में कभी नहीं देखा । इतने सुंदर घड़े को बेच कर तुझे कितना rupeeya मिलेगा... जा इसे राजा को भेट कर दे, वो इस सुंदर घड़े को देख कर अति प्रसन्न होंगे और तुम्हें इनाम में ढेर सारा gold भी देंगे, जिससे तेरा सारा जीवन सवंर जायेगा ।

Journey of a Pitcher 

घड़ा ये सब देख और सुन रहा था, घड़े को कुम्हार और साहूकार की इस प्रसंशा ने मोहित कर दिया । उसे खुद पर गर्व हो आया, कि उससे सुंदर घड़ा कभी नहीं बना और वो संसार का सब से सुंदर घड़ा है । वह अपने दूसरे बर्तन साथियों से बोला, देखो में कितना सौंदर्यवान हूँ कि मेरा रचियता मुझे raja को भेट करेगा और मैं अब raja के Palace में शान से चिरकाल तक विराजित रहूँगा और तुम सब बेच दिए जाओगे, तुम सब को तो यह भी पता नहीं की तुम्हारा new owner तुम सब के साथ कैसा व्यवहार करेगा ।”

तभी आँधी चली और घड़ा लुढका और टुकड़े - टुकड़े हो कर बिखर गया । और जब वह टुकड़े – टुकड़े हो कर बिखरा तो वह God को कोसने लगा –“ तु कितना निष्ठुर है व तुमसे मेरी ख़ुशी देखी नहीं गयी, जो तूने मेरे साथ ऐसा किया । तू  सदा से ऐसा ही निर्दयी है । तू हमेशा हँसते – खेलते लोंगों के अस्तित्व को हमेशा के लिए मिटा देता है ।”

earth mother 

Pitcher टुकड़े - टुकड़े हो कर, जिन धरती mata की गोद में जा गिरा था । उनने घड़े की बात सुनकर घड़े से कहा – पुत्र शांत हो जाओ, तुम मुझसे ही जन्मे हो , इसलिए तुमको समझा रही हूँ । जब तुम को कुम्हार ने गढ़ा तो तुम्हें घड़े का रूप मिला और तुम उपयोगी बने और तुमको आनंद प्राप्त हुआ, पर जब तुम गिर कर टुकड़े – टुकड़े हुए हो तो तुम्हें नहीं पता तुमको क्या मिला... तुम किस अनंतता में विलीन हो गये हो । इस अनंत से मिलना तो स्वयं में एक वरदान है इसे स्वीकार करो । पुत्र ! तुम्हारा अहंकार से पूरित ये शरीर मिटा है न कि तुम्हारी आत्मा, वो अमिट है, अनंत है ।”

धरती माँ की ये बात सुन घड़े का क्षोभ मिट गया और उसे शांति मिली ।
        
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अपना काम स्वयं करें
Do their own job by yourself 
Do their own job by yourself

very famous शिक्षाविद ईश्वर चन्द्र विद्या सागर के अस्तित्व से हम सभी अच्छी तरह से परिचित हैं और जो आज कि युवा पीढ़ी इन्हें नहीं जानती उनके लिए ये विशेष article है जो उनके विशेष अस्तित्व का परिचय हम युवाओं को कराती है साथ में उनका जीवन हमे जीने कि नयी राह और प्रेरणा देता है ।

ईश्वर चन्द्र विद्या सागर का अस्तित्व love, त्याग, परोपकार, न्यायप्रियता, क्षमा शीलता से परिपूर्ण था । उनके जीवन से जुड़े अनेकों ऐसे किस्से – कहानियाँ है जो उनके इन गुणों से हमें अवगत कराती हैं ।

एक बार की बात है, ईश्वर चन्द्र विद्या सागर कलकत्ता के रेलवे स्टेशन पर थे । तभी स्टेशन पर एक ट्रेन आ कर रुकी, उस में से एक नव युवक उतरा । वह देखने में एक student लग रहा था । गाड़ी से उतरते ही वो कुली को पुकारने लगा – कुली –कुली । जबकि उसके पास इतना ही सामान था कि वो उसे आसानी से अकेले ले कर चल सकता था । फिर भी उसे कुली चाहिए था ।

तभी एक उस लड़के के पास एक सीधा – सादा व्यक्ति आता है । वो उस लड़के से आकर पूछता है की कहाँ जाना है और ये पूछते हुए उस लड़के से सामान ले कर उसे उठा लिया ।

लड़का एक student था और वो एक school में training के लिए जा रहा था इसलिए उसने उस school का पता उस man को बता दिया । वो आदमी उसका सामान ले कर उस school चल दिया जो कि वही पास में था । वो जल्दी ही school पहुँच गये । जब वो आदमी सामान रख कर चल दिया, तो लड़के ने उस आदमी को कुछ rupees इनाम में देने चाहे ।

तब सामान उठाने वाले आदमी ने कहा –“ मुझे कोई इनाम नहीं चाहिए । बस अपना काम स्वयं करने की कोशिश करें, यही मेरा इनाम है ।” इतना कहकर वह आदमी वहां से चला गया ।

अगले दिन जब वह लड़का college पंहुचा, तो प्रार्थना स्थल (assembly) पर उसने उसी आदमी को देखा, जो yesterday उसका सामान उठा के college  लाया था । वह आदमी उस समय वहां principal के उच्चासन पर विराजमान था। यह देख वह लड़का बड़ा शर्मिन्दा हुआ ।

prayer के बाद जब सब students अपनी – अपनी class में चले गये तब उसने principal  के चरणों में अपना sir रख कर माफ़ी माँगी ।

तब उन principal  ने जो की ईश्वर चन्द्र विद्या सागर थे, उस लड़के से बोले –“ my son! जो किसी भी कार्य को छोटा नहीं समझते और अपना कार्य स्वयं करते हैं, वो ही जीवन में उन्नति के शिखर पर चल सकते हैं ।” और ये उदाहरण ईश्वर चन्द्र विद्या सागर ने स्वयं उस student का सामान उठा कर दिया और अपना काम स्वयं करने की प्रेरणा दी ।

इतने साधु व्यवहार के और Sacrifice, benevolence, justice, forgiveness जैसे पवित्र गुणों को धारण करने वाले व्यक्ति थे ईश्वर चन्द्र विद्या सागर । ऐसे लोग आज के time पर देखने तक को भी नहीं मिलते जो स्वयं के आचरण से किसी को शिक्षित कर सके ।                     



Friend’s, आप को ये “Do their own job by yourself” motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये । 


One Request: Did you like this personal development base motivational story in Hindi? If yes, become a fan of this blog...please

अंत में आप सब readers को मेरा धन्यवाद!  



Do their own job by yourself- A inspirational real life story in Hindi-


अपना काम स्वयं करें
Do their own job by yourself 
Do their own job by yourself

very famous शिक्षाविद ईश्वर चन्द्र विद्या सागर के अस्तित्व से हम सभी अच्छी तरह से परिचित हैं और जो आज कि युवा पीढ़ी इन्हें नहीं जानती उनके लिए ये विशेष article है जो उनके विशेष अस्तित्व का परिचय हम युवाओं को कराती है साथ में उनका जीवन हमे जीने कि नयी राह और प्रेरणा देता है ।

ईश्वर चन्द्र विद्या सागर का अस्तित्व love, त्याग, परोपकार, न्यायप्रियता, क्षमा शीलता से परिपूर्ण था । उनके जीवन से जुड़े अनेकों ऐसे किस्से – कहानियाँ है जो उनके इन गुणों से हमें अवगत कराती हैं ।

एक बार की बात है, ईश्वर चन्द्र विद्या सागर कलकत्ता के रेलवे स्टेशन पर थे । तभी स्टेशन पर एक ट्रेन आ कर रुकी, उस में से एक नव युवक उतरा । वह देखने में एक student लग रहा था । गाड़ी से उतरते ही वो कुली को पुकारने लगा – कुली –कुली । जबकि उसके पास इतना ही सामान था कि वो उसे आसानी से अकेले ले कर चल सकता था । फिर भी उसे कुली चाहिए था ।

तभी एक उस लड़के के पास एक सीधा – सादा व्यक्ति आता है । वो उस लड़के से आकर पूछता है की कहाँ जाना है और ये पूछते हुए उस लड़के से सामान ले कर उसे उठा लिया ।

लड़का एक student था और वो एक school में training के लिए जा रहा था इसलिए उसने उस school का पता उस man को बता दिया । वो आदमी उसका सामान ले कर उस school चल दिया जो कि वही पास में था । वो जल्दी ही school पहुँच गये । जब वो आदमी सामान रख कर चल दिया, तो लड़के ने उस आदमी को कुछ rupees इनाम में देने चाहे ।

तब सामान उठाने वाले आदमी ने कहा –“ मुझे कोई इनाम नहीं चाहिए । बस अपना काम स्वयं करने की कोशिश करें, यही मेरा इनाम है ।” इतना कहकर वह आदमी वहां से चला गया ।

अगले दिन जब वह लड़का college पंहुचा, तो प्रार्थना स्थल (assembly) पर उसने उसी आदमी को देखा, जो yesterday उसका सामान उठा के college  लाया था । वह आदमी उस समय वहां principal के उच्चासन पर विराजमान था। यह देख वह लड़का बड़ा शर्मिन्दा हुआ ।

prayer के बाद जब सब students अपनी – अपनी class में चले गये तब उसने principal  के चरणों में अपना sir रख कर माफ़ी माँगी ।

तब उन principal  ने जो की ईश्वर चन्द्र विद्या सागर थे, उस लड़के से बोले –“ my son! जो किसी भी कार्य को छोटा नहीं समझते और अपना कार्य स्वयं करते हैं, वो ही जीवन में उन्नति के शिखर पर चल सकते हैं ।” और ये उदाहरण ईश्वर चन्द्र विद्या सागर ने स्वयं उस student का सामान उठा कर दिया और अपना काम स्वयं करने की प्रेरणा दी ।

इतने साधु व्यवहार के और Sacrifice, benevolence, justice, forgiveness जैसे पवित्र गुणों को धारण करने वाले व्यक्ति थे ईश्वर चन्द्र विद्या सागर । ऐसे लोग आज के time पर देखने तक को भी नहीं मिलते जो स्वयं के आचरण से किसी को शिक्षित कर सके ।                     



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lab love-affection

Thomas Alva Edison - His Lab affection  

Famous scientist Thomas Alva Edison अपनी धुन के पक्के थे वो जिस कम को भी हाथ में लेते थे उसे पूरा किये बिना साँस नहीं लेते थे । Edison को काम करने का नशा था । वे एक बार अपनी धुन में जब प्रयोगशाला में घुस जाते थे तो प्रोग्शाला से जल्दी बाहर ही नहीं निकलते थे । उनको प्रोग्शाला में रहना इतना पसंद था की जब वो lab में घुस जाते तो वहीँ लैब में ही रम के रह जाते थे ।Edison के इस lab प्रेम से उनकी wife बहुत परेशान रहती थीं । काम के प्रति उनकी धुन से उनकी wife उनसे हमेशा चिढ़ी – चिढ़ी सी रहती थीं ।

एक बार तो Edison ने हद कर दी, वो एक बार वो अपने किसी experiment के लिए Laboratory में घुसे तो काफी दिनों तक बाहर निकले ही नहीं निकले । वे lab में ही पुर्णतः निवास कर रहे थे । फिर आखिरकार काफी दिनों बाद जब वह अपनी  Laboratory से बाहर आये, तो उनकी प्रिय पत्नी ने उनको सलाह दी –“ my dear, आप Night and day काम में लगे रहते हैं । आप थक जाते होंगे, कभी - कभार rest भी कर लिया करें । कभी तो छुट्टी कर लिया करें ।”

इस पर Edison बोले –“ लेकिन में छुट्टी ले कर जाऊं कहाँ ?”

wife बोली-“ my dear, जहाँ तुम्हारा मन चाहे ।“

“Okay! तो फिर मैं वहीँ जाता हूँ ।” यह कह कर Edison फिर से सीधे अपनी Favorite lab में घुस गये ।”    

Friend’s, आप को ये Thomas Alva Edison - His Lab affection motivational story, Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये । 

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Thomas Alva Edison - His Lab affection- A inspirational true real life story in Hindi



lab love-affection

Thomas Alva Edison - His Lab affection  

Famous scientist Thomas Alva Edison अपनी धुन के पक्के थे वो जिस कम को भी हाथ में लेते थे उसे पूरा किये बिना साँस नहीं लेते थे । Edison को काम करने का नशा था । वे एक बार अपनी धुन में जब प्रयोगशाला में घुस जाते थे तो प्रोग्शाला से जल्दी बाहर ही नहीं निकलते थे । उनको प्रोग्शाला में रहना इतना पसंद था की जब वो lab में घुस जाते तो वहीँ लैब में ही रम के रह जाते थे ।Edison के इस lab प्रेम से उनकी wife बहुत परेशान रहती थीं । काम के प्रति उनकी धुन से उनकी wife उनसे हमेशा चिढ़ी – चिढ़ी सी रहती थीं ।

एक बार तो Edison ने हद कर दी, वो एक बार वो अपने किसी experiment के लिए Laboratory में घुसे तो काफी दिनों तक बाहर निकले ही नहीं निकले । वे lab में ही पुर्णतः निवास कर रहे थे । फिर आखिरकार काफी दिनों बाद जब वह अपनी  Laboratory से बाहर आये, तो उनकी प्रिय पत्नी ने उनको सलाह दी –“ my dear, आप Night and day काम में लगे रहते हैं । आप थक जाते होंगे, कभी - कभार rest भी कर लिया करें । कभी तो छुट्टी कर लिया करें ।”

इस पर Edison बोले –“ लेकिन में छुट्टी ले कर जाऊं कहाँ ?”

wife बोली-“ my dear, जहाँ तुम्हारा मन चाहे ।“

“Okay! तो फिर मैं वहीँ जाता हूँ ।” यह कह कर Edison फिर से सीधे अपनी Favorite lab में घुस गये ।”    

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