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कश्मीर के त्यागी, अपरिग्रही विद्वान कल्हण – कश्मीर का सम्मान

Kashmir- Heaven on Earth 

Kashmir solitaire, Aprigrhi scholar kalhan – honor of Kashmir

कश्मीर एक ऐसा शहर जिसे दुनिया का दूसरा जन्नत कहा जाता है इसका नाम जेहन में आते ही यहाँ के वातावरण की सुन्दरता, पवित्रता बसबस ही हमारे मन को अपनी और खींचने लगती है । और इसी लिए इसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है ।

Heaven शब्द मन में आते ही हर तरफ Holiness, Beauty and Charms, Happiness – prosperity, Knowledge, Dedication और Disclaimer के विचार अंत:करण में उठने लगते हैं और ऐसा लगता है कि स्वर्ग में इन गुणों से पूरित लोग ही रहते हैं तभी तो वहां सुख – वैभव स्थापित है क्योंकि इन गुणों के बिना तो जीवन नर्क में होता है । और Kashmir को Paradise इसीलिए कहते हैं क्योंकि यहाँ कि धरती के लोग, ज्ञान – वैभव से समर्पण – त्याग के गुणों से परिपूर्ण हैं और इनका अंत:करण ओत –प्रोत है आन्तरिक पवित्रता, व ज्ञान से

ऐसी ही Solitaire, Scholar, देश को समर्पित ऋषि अस्तिव को धारण करने वाली Kashmir की धरती पर एक विद्वान सत्ता हुई है जिनको सब श्रद्धा से ऋषि कल्हण कहते हैं

कल्हण कश्मीर के अपने समय के बड़े विद्वान हैं । इन्होंने कई भाष्य लिखे है । इनके लिखे सभी साहित्य, साहित्य जगत में मील के पत्थर हैं । कल्हण बहुत- बड़े विद्वान होते हुए भी एक सहज संत थे । वो आत्म संतोषी थे । और साथ ही धन संचय से स्वयं को दूर रखते थे । Kashmir के raja उनकी विद्वत्ता के आगे नतमस्तक थे और हर - समय ऋषि कल्हण को सम्मानित करने को लालायायित रहते थे । उन्होंने ने उनको कई बार धन – वैभव देकर  सम्मानित करना चाहा पर कल्हण ने उस सामान को थूका दिया । उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो सादा, पवित्र व अपरिग्रह ब्राह्मण का जीवन जीते हुए, अपने ज्ञान के द्वारा साहित्य जगत की सेवा करना कहते थे । वो एक सच्चे अपरिग्रही संत थे ।

एक बार, कल्हण से मिलने उज्जयनी से एक विद्वमंडल आया । कल्हण उन सभी से अपनी झोंपड़ी के बाहर मिले, नैसर्गिक परिसर, नदी के किनारे हरी हरी घास पर सभी बैठ कर चिंतन – परामर्श कर बड़े प्रसन्न हुए। इसके साथ ही उज्जनी के विद्वान मन ही मन Kashmir के raja से अप्रसन्न हुए। उन्हें लगा कि Kashmir का राजा परखी नहीं है, उसे विद्वानों कि कद्र नहीं है। जो उसने इतने प्रख्यात और सम्मानयीय चिन्तक – लेखक को उचित सम्मान नहीं दिया। इतने बड़े विद्वान को वो एक भवन तक नहीं दे पाए । यहाँ तो सिर्फ गरीबी ही गरीबी दिख रही है, राजा को क्या एक भवन तक इतने बड़े विद्वान को नहीं देना चाहिए था । यहाँ का raja तो बड़ा निष्ठुर है ।

वो सब के सब राजा के पास गये और वहां पहुँच कर सभी ने राजा के सामने अपना असंतोष प्रदर्शित किया और उनको खरा खोता सुनाया । राजा ने सभी विद्वजनों से बड़े ही विनम्र भाव से कहा -“ मान्यवर! हम तो कह – कहकर और प्रयास कर – कर के थक गये हैं । प्रभु कल्हण तो कुछ स्वीकार ही नहीं करते । यहाँ तक ऋषि कल्हण तो कहते है कि अब यदी आप जिद करेगे तो हम आप का राज्य छोड़ देंगे। आप प्रयास करके देखें, हम आप को साधन देते हैं ।”

सभी विद्वान जन राजा कि दी हुई सामग्री लेकर कल्हण की झोंपड़ी पर पहुँचे । जब kalhan को पता चला कि राजा ने पुनः सामान भेजा है तो वो अपनी wife से बोले – “ सामान बांध लो। यहाँ के राजा को धन का घमंड हो गया है । हम इस राज्य में अब नहीं रहेंगे।” सभी विद्वानों को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो सभी ने कल्हण से क्षमा याचना की । और कल्हण से वो बोले – “ हमारे आग्रह पर raja ने विवश होकर यह सामग्री भेजी है। हम आके अपरिग्रही ब्राह्मण वाले स्वरूप को पहचान नहीं पाए थे, और राजा को गलत समझ बैठे थे और उनसे आप को ये सामग्री देने की जिद की थी । यह हमारा ही अज्ञान था ।”
                         
     अपरिग्रही का अर्थ होता धन का संचय न करने वाला। स्वयं की मेहनत पर, समाज पर और अपने भगवान पर विश्वास करने वाला । और एक सच्चे ब्राह्मण का असली अस्तित्व ही अपरिग्रह जीवन जीना है । और अपरिग्रही जीवन ही एक संत व ब्राह्मण की सिद्धि होती है ।
         
Friend’s, आप को मेरी “Kashmir solitaire, Aprigrhi scholar kalhan – honor of Kashmir” motivational story in Hindi में कैसी लगी? क्या ये story सबकी life (personality) में positivity ला सकने में कुछ सहयोगी हो सकेगी, if yes तो please comments के द्वारा जरुर बताये 
       
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Kashmir solitaire, Aprigrhi scholar kalhan – honor of Kashmir- true and real life Hindi Motivational and Inspirational story.-Essay in Hindi


कश्मीर के त्यागी, अपरिग्रही विद्वान कल्हण – कश्मीर का सम्मान

Kashmir- Heaven on Earth 

Kashmir solitaire, Aprigrhi scholar kalhan – honor of Kashmir

कश्मीर एक ऐसा शहर जिसे दुनिया का दूसरा जन्नत कहा जाता है इसका नाम जेहन में आते ही यहाँ के वातावरण की सुन्दरता, पवित्रता बसबस ही हमारे मन को अपनी और खींचने लगती है । और इसी लिए इसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है ।

Heaven शब्द मन में आते ही हर तरफ Holiness, Beauty and Charms, Happiness – prosperity, Knowledge, Dedication और Disclaimer के विचार अंत:करण में उठने लगते हैं और ऐसा लगता है कि स्वर्ग में इन गुणों से पूरित लोग ही रहते हैं तभी तो वहां सुख – वैभव स्थापित है क्योंकि इन गुणों के बिना तो जीवन नर्क में होता है । और Kashmir को Paradise इसीलिए कहते हैं क्योंकि यहाँ कि धरती के लोग, ज्ञान – वैभव से समर्पण – त्याग के गुणों से परिपूर्ण हैं और इनका अंत:करण ओत –प्रोत है आन्तरिक पवित्रता, व ज्ञान से

ऐसी ही Solitaire, Scholar, देश को समर्पित ऋषि अस्तिव को धारण करने वाली Kashmir की धरती पर एक विद्वान सत्ता हुई है जिनको सब श्रद्धा से ऋषि कल्हण कहते हैं

कल्हण कश्मीर के अपने समय के बड़े विद्वान हैं । इन्होंने कई भाष्य लिखे है । इनके लिखे सभी साहित्य, साहित्य जगत में मील के पत्थर हैं । कल्हण बहुत- बड़े विद्वान होते हुए भी एक सहज संत थे । वो आत्म संतोषी थे । और साथ ही धन संचय से स्वयं को दूर रखते थे । Kashmir के raja उनकी विद्वत्ता के आगे नतमस्तक थे और हर - समय ऋषि कल्हण को सम्मानित करने को लालायायित रहते थे । उन्होंने ने उनको कई बार धन – वैभव देकर  सम्मानित करना चाहा पर कल्हण ने उस सामान को थूका दिया । उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वो सादा, पवित्र व अपरिग्रह ब्राह्मण का जीवन जीते हुए, अपने ज्ञान के द्वारा साहित्य जगत की सेवा करना कहते थे । वो एक सच्चे अपरिग्रही संत थे ।

एक बार, कल्हण से मिलने उज्जयनी से एक विद्वमंडल आया । कल्हण उन सभी से अपनी झोंपड़ी के बाहर मिले, नैसर्गिक परिसर, नदी के किनारे हरी हरी घास पर सभी बैठ कर चिंतन – परामर्श कर बड़े प्रसन्न हुए। इसके साथ ही उज्जनी के विद्वान मन ही मन Kashmir के raja से अप्रसन्न हुए। उन्हें लगा कि Kashmir का राजा परखी नहीं है, उसे विद्वानों कि कद्र नहीं है। जो उसने इतने प्रख्यात और सम्मानयीय चिन्तक – लेखक को उचित सम्मान नहीं दिया। इतने बड़े विद्वान को वो एक भवन तक नहीं दे पाए । यहाँ तो सिर्फ गरीबी ही गरीबी दिख रही है, राजा को क्या एक भवन तक इतने बड़े विद्वान को नहीं देना चाहिए था । यहाँ का raja तो बड़ा निष्ठुर है ।

वो सब के सब राजा के पास गये और वहां पहुँच कर सभी ने राजा के सामने अपना असंतोष प्रदर्शित किया और उनको खरा खोता सुनाया । राजा ने सभी विद्वजनों से बड़े ही विनम्र भाव से कहा -“ मान्यवर! हम तो कह – कहकर और प्रयास कर – कर के थक गये हैं । प्रभु कल्हण तो कुछ स्वीकार ही नहीं करते । यहाँ तक ऋषि कल्हण तो कहते है कि अब यदी आप जिद करेगे तो हम आप का राज्य छोड़ देंगे। आप प्रयास करके देखें, हम आप को साधन देते हैं ।”

सभी विद्वान जन राजा कि दी हुई सामग्री लेकर कल्हण की झोंपड़ी पर पहुँचे । जब kalhan को पता चला कि राजा ने पुनः सामान भेजा है तो वो अपनी wife से बोले – “ सामान बांध लो। यहाँ के राजा को धन का घमंड हो गया है । हम इस राज्य में अब नहीं रहेंगे।” सभी विद्वानों को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तो सभी ने कल्हण से क्षमा याचना की । और कल्हण से वो बोले – “ हमारे आग्रह पर raja ने विवश होकर यह सामग्री भेजी है। हम आके अपरिग्रही ब्राह्मण वाले स्वरूप को पहचान नहीं पाए थे, और राजा को गलत समझ बैठे थे और उनसे आप को ये सामग्री देने की जिद की थी । यह हमारा ही अज्ञान था ।”
                         
     अपरिग्रही का अर्थ होता धन का संचय न करने वाला। स्वयं की मेहनत पर, समाज पर और अपने भगवान पर विश्वास करने वाला । और एक सच्चे ब्राह्मण का असली अस्तित्व ही अपरिग्रह जीवन जीना है । और अपरिग्रही जीवन ही एक संत व ब्राह्मण की सिद्धि होती है ।
         
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This is a true, marvelous and pure love story 
  base on Marie Curie and Pierre Curie. 

मैरी क्यूरी और पियरे क्यूरी की अदभुत और पवित्र प्रेम कथा

Marriage से पहले मैरी क्यूरी को सभी लोग मान्या (मैरी स्क्लोंदोव्स्का) के नाम से बुलाते थे । और उनका पूरा नाम ‘मैरी स्क्लोंदोव्स्का’ था मान्या की बड़ी बहन ब्रोन्या सोरबोन peris में पढ़ना चाहती थी । वहीँ पर मान्या की भी यही इच्छा थी की वो भी अपनी study paris में पूरी करें । पर उनकी इस इच्छा में उनकी आर्थिक मजबूरी आड़े आ रही थी । पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और paris में ही पढाई करने का निश्चय किया । इसके लिए paris में मान्या ने governance की job कर ली ।

मान्या पेरिस के जिस घर में काम करती थी, उसी घर में एक लड़का कसीमिर वारसा university में पढ़ता था । वह अपनी छुट्टियाँ बिताने घर आया था। और अपने घर पर मान्या (मैरी स्क्लोंदोव्स्का) को देखते ही पहली नज़र में उनको दिल दे बैठा ।

कसीमिर (पियारे क्यूरी) की mother को जब यह पता चला, तो उसने खुल कर इस प्यार का विरोध किया और कहा कि मैं किसी गवर्नेस को अपनी बहू नहीं बना सकतीं।

अपने first love में असफल होने के बाद कसीमिर का हाल बहुत बुरा था। अब उसके जीवन में अपने first love में fail होने के बाद किसी और woman का स्थान नहीं था।

संयोग से one day, इन दोनों कि पुन: भेट हो गयी । इन दोनों की professor एम. कोब्लस्की के आवास पर अचानक मुलाकात हो गयी, जो उन दिनों paris भ्रमण के लिए आये हुए थे ।

अपनी इस भेट के बारे में स्वयं मैरी ने बहुत ही सुंदर वर्णन इन words में किया है –“ जब मैं वहां पहुची, तो 35 year old पियारे क्यूरी एक window के पास खड़े थे । वह मुझे बहुत सजीला युवक लगा । उनकी आखों के निश्छल भाव और उनके व्यक्तित्व से प्रकट होने वाली सहज लापरवाही ने मुझे एकदम मोहित कर लिया। उनका धीरे – धीरे बोलना, उनका सरल और सादा व्यक्तिव, उनका एक साथ ही गम्भीर और यौवन से पूर्ण होना मुझे एकदम भा गया ।”

उस समय पियरे paris के Institute of Chemistry and Physics के president थे और अपने Scientific research के बल पर वह French scientists में अग्रणी बन चुके थे । और उनकों फ्रांस सरकार से मात्र three hundred franc का वेतमान मिलता था । पियरे क्यूरी मैरी स्क्लोंदोव्स्का से विवाह करना चाहते थे, पर इतनी कम salary के कारण marriage का प्रस्ताव मैरी स्क्लोंदोव्स्का के सामने रखने में हिचक रहे थे । पर क्या करें दिल के आगे सब मजबूर हो जाते हैं। पियरे भी दिल के आगे मजबूर थे । और आखिर में डरते- डरते उन्होंने मैरी स्क्लोंदोव्स्का के आगे विवाह प्रस्ताव रख ही दिया, और मैरी स्क्लोंदोव्स्का ने भी इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार किया । इस तरह सन 1865 में मान्य,- मैरी स्क्लोंदोव्स्का से मैरी क्यूरी बन गयी ।      

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a true, marvelous and pure real life love story in Hindi

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This is a true, marvelous and pure love story 
  base on Marie Curie and Pierre Curie. 

मैरी क्यूरी और पियरे क्यूरी की अदभुत और पवित्र प्रेम कथा

Marriage से पहले मैरी क्यूरी को सभी लोग मान्या (मैरी स्क्लोंदोव्स्का) के नाम से बुलाते थे । और उनका पूरा नाम ‘मैरी स्क्लोंदोव्स्का’ था मान्या की बड़ी बहन ब्रोन्या सोरबोन peris में पढ़ना चाहती थी । वहीँ पर मान्या की भी यही इच्छा थी की वो भी अपनी study paris में पूरी करें । पर उनकी इस इच्छा में उनकी आर्थिक मजबूरी आड़े आ रही थी । पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और paris में ही पढाई करने का निश्चय किया । इसके लिए paris में मान्या ने governance की job कर ली ।

मान्या पेरिस के जिस घर में काम करती थी, उसी घर में एक लड़का कसीमिर वारसा university में पढ़ता था । वह अपनी छुट्टियाँ बिताने घर आया था। और अपने घर पर मान्या (मैरी स्क्लोंदोव्स्का) को देखते ही पहली नज़र में उनको दिल दे बैठा ।

कसीमिर (पियारे क्यूरी) की mother को जब यह पता चला, तो उसने खुल कर इस प्यार का विरोध किया और कहा कि मैं किसी गवर्नेस को अपनी बहू नहीं बना सकतीं।

अपने first love में असफल होने के बाद कसीमिर का हाल बहुत बुरा था। अब उसके जीवन में अपने first love में fail होने के बाद किसी और woman का स्थान नहीं था।

संयोग से one day, इन दोनों कि पुन: भेट हो गयी । इन दोनों की professor एम. कोब्लस्की के आवास पर अचानक मुलाकात हो गयी, जो उन दिनों paris भ्रमण के लिए आये हुए थे ।

अपनी इस भेट के बारे में स्वयं मैरी ने बहुत ही सुंदर वर्णन इन words में किया है –“ जब मैं वहां पहुची, तो 35 year old पियारे क्यूरी एक window के पास खड़े थे । वह मुझे बहुत सजीला युवक लगा । उनकी आखों के निश्छल भाव और उनके व्यक्तित्व से प्रकट होने वाली सहज लापरवाही ने मुझे एकदम मोहित कर लिया। उनका धीरे – धीरे बोलना, उनका सरल और सादा व्यक्तिव, उनका एक साथ ही गम्भीर और यौवन से पूर्ण होना मुझे एकदम भा गया ।”

उस समय पियरे paris के Institute of Chemistry and Physics के president थे और अपने Scientific research के बल पर वह French scientists में अग्रणी बन चुके थे । और उनकों फ्रांस सरकार से मात्र three hundred franc का वेतमान मिलता था । पियरे क्यूरी मैरी स्क्लोंदोव्स्का से विवाह करना चाहते थे, पर इतनी कम salary के कारण marriage का प्रस्ताव मैरी स्क्लोंदोव्स्का के सामने रखने में हिचक रहे थे । पर क्या करें दिल के आगे सब मजबूर हो जाते हैं। पियरे भी दिल के आगे मजबूर थे । और आखिर में डरते- डरते उन्होंने मैरी स्क्लोंदोव्स्का के आगे विवाह प्रस्ताव रख ही दिया, और मैरी स्क्लोंदोव्स्का ने भी इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार किया । इस तरह सन 1865 में मान्य,- मैरी स्क्लोंदोव्स्का से मैरी क्यूरी बन गयी ।      

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यश की कामना

Kudos to wish

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एक गाँव में दो मुर्गे रहते थे एक का नाम चमकू और दूसरे का चम्पू था । दोनों को हमेशा अपने यश की चिंता रहती थी, कि उनका yash दूसरे से ज्यादा हो। चूँकि दोनों ही अपने को श्रेष्ठ मानते थे इसलिए उनमें हमेशा प्रतिस्पर्धा छिड़ी रहती थी।  खुद को सर्व शक्तिशाली मनवाने के लिए दोनों हमेशा ही लड़ते रहते थे ।

एक दिन दोनों village में एक कूड़े के ढेर पर बैठे हुए धूप सेंक रहे थे । कि अचानक दोनों में खुद हो great बताने में बहस छिड़ गई औए ये बस इतनी बढ़ी की दोनों में बातों बातों से शुरू हो कर, हाथापायी में बदल गई। उनका ये fight देखने के लिए सारे मुर्गे और Chickens इकट्ठे हो गये।

चमकू और चम्पू एक दूसरे पर वार करने लेगे। कभी चमकू भारी पड़ता तो कभी चम्पू इस तरह उनका युद्ध बहुत बढ़ता ही गया, पर अंत में चम्पू, चमकू से शरीरिक रूप से बलवान होने के कारण जीत गया ; और चम्पू ने चमकू को पराजित कर भगा दिया।

ये युद्ध देख रहे मुर्गे – मुर्गियाँ ने चम्पू को घेर लिया और उसकी प्रसंशा करने लगे। वे सब चम्पू मुर्गे का यशगान करने लगे। वे उससे बोले तुम तो बहुत बलिष्ट औए श्रेष्ठ हो जो तुमने चमकू जैसे बलवान मुर्गे को हरा दिया।

चम्पू मुर्गा ने जब अपना यश गान सुना, तो वो ख़ुशी से फुला नहीं समाया और उसके ह्रदय में अपना यश और बढ़ाने कि कामना तीव्र हो गयी । और उसने उन सब मुर्गे और मुर्गियों से कहा कि आस- पास के हर गाँव में मेरी कीर्ति का बखान होना चाहिए, मेरा यश पहुँचना चाहिए।

अपने यश को चारों तरफ फैलाने की तीव्र कामना से वो एक बहुत ही ऊँचे टीले पर चढ़ गया और सब से बोला देखो में कितनी उचाई तक चढ़ सकता हूँ। इतने ऊँचे टीले पर क्या कोई दूसरा चढ़ सकता है । फिर उसने बड़े गर्व से अपने पंखों को फड़ फड़ाया और ऊँचे स्वर से बोला –“ मेरे समान यहाँ दूसरा कोई और मुर्गा नहीं है । मैं सब से बलवान हूँ । मैं एक विजयी मुर्गा हूँ ।”

चम्पू जब यह बोल रहा था तब उस ऊँचे टीले के ऊपर एक गिद्ध मडरा रहा था । उसने इतनी ऊँचाई पर चम्पू मुर्गे को अकेले देखा तो उसने एक झपट्टा मारा और चम्पू को अपने पंजों में दबोचकर उड़ गया ।

friends, चम्पू ने खुद को महान और विजयी तो मनवा लिया, पर महान बने के लोभ में अपनी life भी गवां दी । कभी- कभी यश,विजय और महानता की कामना व्यक्ति का सर्वनाश कर देती है ।


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Kudos to wish- a motivational story in Hindi



यश की कामना

Kudos to wish

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एक गाँव में दो मुर्गे रहते थे एक का नाम चमकू और दूसरे का चम्पू था । दोनों को हमेशा अपने यश की चिंता रहती थी, कि उनका yash दूसरे से ज्यादा हो। चूँकि दोनों ही अपने को श्रेष्ठ मानते थे इसलिए उनमें हमेशा प्रतिस्पर्धा छिड़ी रहती थी।  खुद को सर्व शक्तिशाली मनवाने के लिए दोनों हमेशा ही लड़ते रहते थे ।

एक दिन दोनों village में एक कूड़े के ढेर पर बैठे हुए धूप सेंक रहे थे । कि अचानक दोनों में खुद हो great बताने में बहस छिड़ गई औए ये बस इतनी बढ़ी की दोनों में बातों बातों से शुरू हो कर, हाथापायी में बदल गई। उनका ये fight देखने के लिए सारे मुर्गे और Chickens इकट्ठे हो गये।

चमकू और चम्पू एक दूसरे पर वार करने लेगे। कभी चमकू भारी पड़ता तो कभी चम्पू इस तरह उनका युद्ध बहुत बढ़ता ही गया, पर अंत में चम्पू, चमकू से शरीरिक रूप से बलवान होने के कारण जीत गया ; और चम्पू ने चमकू को पराजित कर भगा दिया।

ये युद्ध देख रहे मुर्गे – मुर्गियाँ ने चम्पू को घेर लिया और उसकी प्रसंशा करने लगे। वे सब चम्पू मुर्गे का यशगान करने लगे। वे उससे बोले तुम तो बहुत बलिष्ट औए श्रेष्ठ हो जो तुमने चमकू जैसे बलवान मुर्गे को हरा दिया।

चम्पू मुर्गा ने जब अपना यश गान सुना, तो वो ख़ुशी से फुला नहीं समाया और उसके ह्रदय में अपना यश और बढ़ाने कि कामना तीव्र हो गयी । और उसने उन सब मुर्गे और मुर्गियों से कहा कि आस- पास के हर गाँव में मेरी कीर्ति का बखान होना चाहिए, मेरा यश पहुँचना चाहिए।

अपने यश को चारों तरफ फैलाने की तीव्र कामना से वो एक बहुत ही ऊँचे टीले पर चढ़ गया और सब से बोला देखो में कितनी उचाई तक चढ़ सकता हूँ। इतने ऊँचे टीले पर क्या कोई दूसरा चढ़ सकता है । फिर उसने बड़े गर्व से अपने पंखों को फड़ फड़ाया और ऊँचे स्वर से बोला –“ मेरे समान यहाँ दूसरा कोई और मुर्गा नहीं है । मैं सब से बलवान हूँ । मैं एक विजयी मुर्गा हूँ ।”

चम्पू जब यह बोल रहा था तब उस ऊँचे टीले के ऊपर एक गिद्ध मडरा रहा था । उसने इतनी ऊँचाई पर चम्पू मुर्गे को अकेले देखा तो उसने एक झपट्टा मारा और चम्पू को अपने पंजों में दबोचकर उड़ गया ।

friends, चम्पू ने खुद को महान और विजयी तो मनवा लिया, पर महान बने के लोभ में अपनी life भी गवां दी । कभी- कभी यश,विजय और महानता की कामना व्यक्ति का सर्वनाश कर देती है ।


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as a child i always used to think that i have to be a scientist 

टामस ऐल्वा एडिसन- बचपन में हमेशा यही सोचते थे, कि मुझे एक वैज्ञानिक बनना है-   

The great inventor टामस ऐल्वा एडिसन का जन्म ओहायो राज्य के Milan city में 11 फरवरी, 1847 ई. को हुआ था । एडिसन बचपन से ही वैज्ञानिक बनने की बात किया करते थे । पर उनका बचपन बहुत गरीबी में था । वे एक गरीब माँ के बेटे थे । इसलिए six year तक उनकी माता ने उनको घर पर ही पढाया।
एडिसन कि माँ हमेशा अपने son के dream को पूरा करने में help करने की सोचती रहती। पर उसके पास इतना धन नहीं था की वो अपने पुत्र को science की महंगी पढाई करा कर, एडिसन को वैज्ञानिक बना सके ।

एक दिन उनकी माँ ने सोचा यदी मैं एडिसन को किसी बड़े scientist के पास काम पर रख दूँ तो शायद मेरे बेटे की इच्छा को पूर्ण करने का समाधान हो जाये। ऐसा सोच कर वह एडिसन को एक वैज्ञानिक के पास ले गई । और अपने son एडिसन की desire के बारे में scientist से बात की ।

वैज्ञानिक ने एडिसन को एक झाड़ू देकर अपनी प्रयोगशाला की सफाई करने को कहा। एडिसन ने हर काम को बड़े ही करीने से किया । कहीं किसी कोने में भी गंदगी न छोड़ी और हर सामान सफाई के बाद यथा स्थान पर रख दिए।  

Scientist ने यह सब देख कर कहा –“इस child में scientist बनने के गुण हैं। आप इसे मेरे पास छोड़ दें । आप का यह बेटा वैज्ञानिक जरूर बनेगा । क्योंकि सफाई और व्यवस्था से मनुष्य के व्यक्तिव के विकास की क्षमता बढ़ती है और उसी से उसके विकास कि सम्भावना के स्तर का पता भी चलता है।  

friends, ये सच है व्यक्ति की quality और उसकी ability उसके कार्यों से, उसके behavior से ही चलती है । आप क्या सोचते हैं, आप क्या चाहते है सब कुछ के बारे में आप के कार्य, कार्यों को करने के तरीके से पता चलता है क्योंकि आप जो सोचते हो, चाहते हो, वैसा ही आप behave करते हो।
इसलिए हमे अपनी desire, अपनी सोच में और अपने action में सही ताल मेल जरूर बैठाना चाहिए।             


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As a child I always used to think that I have to be a scientist- A motivational article in Hindi

as a child i always used to think that i have to be a scientist 

टामस ऐल्वा एडिसन- बचपन में हमेशा यही सोचते थे, कि मुझे एक वैज्ञानिक बनना है-   

The great inventor टामस ऐल्वा एडिसन का जन्म ओहायो राज्य के Milan city में 11 फरवरी, 1847 ई. को हुआ था । एडिसन बचपन से ही वैज्ञानिक बनने की बात किया करते थे । पर उनका बचपन बहुत गरीबी में था । वे एक गरीब माँ के बेटे थे । इसलिए six year तक उनकी माता ने उनको घर पर ही पढाया।
एडिसन कि माँ हमेशा अपने son के dream को पूरा करने में help करने की सोचती रहती। पर उसके पास इतना धन नहीं था की वो अपने पुत्र को science की महंगी पढाई करा कर, एडिसन को वैज्ञानिक बना सके ।

एक दिन उनकी माँ ने सोचा यदी मैं एडिसन को किसी बड़े scientist के पास काम पर रख दूँ तो शायद मेरे बेटे की इच्छा को पूर्ण करने का समाधान हो जाये। ऐसा सोच कर वह एडिसन को एक वैज्ञानिक के पास ले गई । और अपने son एडिसन की desire के बारे में scientist से बात की ।

वैज्ञानिक ने एडिसन को एक झाड़ू देकर अपनी प्रयोगशाला की सफाई करने को कहा। एडिसन ने हर काम को बड़े ही करीने से किया । कहीं किसी कोने में भी गंदगी न छोड़ी और हर सामान सफाई के बाद यथा स्थान पर रख दिए।  

Scientist ने यह सब देख कर कहा –“इस child में scientist बनने के गुण हैं। आप इसे मेरे पास छोड़ दें । आप का यह बेटा वैज्ञानिक जरूर बनेगा । क्योंकि सफाई और व्यवस्था से मनुष्य के व्यक्तिव के विकास की क्षमता बढ़ती है और उसी से उसके विकास कि सम्भावना के स्तर का पता भी चलता है।  

friends, ये सच है व्यक्ति की quality और उसकी ability उसके कार्यों से, उसके behavior से ही चलती है । आप क्या सोचते हैं, आप क्या चाहते है सब कुछ के बारे में आप के कार्य, कार्यों को करने के तरीके से पता चलता है क्योंकि आप जो सोचते हो, चाहते हो, वैसा ही आप behave करते हो।
इसलिए हमे अपनी desire, अपनी सोच में और अपने action में सही ताल मेल जरूर बैठाना चाहिए।             


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